पश्चिम बंगाल और असम में BJP की किस्मत का फैसला सिर्फ़ एक वोट ब्लॉक पर

पांच राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों — **असम**, **पश्चिम बंगाल**, **तमिलनाडु**, **केरल**, और **पुडुचेरी** — के विधानसभा चुनाव अप्रैल 2026 में होने हैं, और इनके नतीजे 4 मई को आएंगे। ये चुनाव **भारतीय जनता पार्टी (BJP)** के लिए बहुत अहम हैं; पार्टी का लक्ष्य पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में सरकार बनाना है, जबकि वह तमिलनाडु और केरल में भी अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है।

पश्चिम बंगाल: 5% का बदलाव गेम-चेंजर साबित हो सकता है
पश्चिम बंगाल (294 सीटें) में BJP ने ज़बरदस्त बढ़त दिखाई है। 2016 में सिर्फ़ तीन सीटों से बढ़कर, 2021 के विधानसभा चुनावों में पार्टी **77 सीटों** और **38% वोट शेयर** तक पहुंच गई; वहीं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सत्ताधारी **तृणमूल कांग्रेस (TMC)** ने 48% वोट शेयर के साथ 215 सीटें जीतीं। कई सीटों पर मुकाबला बहुत कड़ा था: BJP दर्जनों सीटें 5-10% से भी कम के अंतर से हार गई।

जानकारों का मानना ​​है कि अहम सीटों पर TMC से BJP की तरफ़ महज़ **5% वोटों का बदलाव** भी कई सीटों का नतीजा पलट सकता है, जिससे BJP 148 सीटों के बहुमत के आंकड़े के और करीब पहुंच सकती है। हाल के ओपिनियन पोल के मुताबिक, TMC को 174-184 सीटें और BJP को 100-118 सीटें मिलने का अनुमान है। यह दिखाता है कि बेरोज़गारी, शासन से जुड़े मुद्दों और स्थानीय शिकायतों को लेकर सत्ता-विरोधी लहर के बीच मुकाबला और भी कड़ा होता जा रहा है। यह मुकाबला मुख्य रूप से TMC और BJP के बीच ही है।

### असम: मुस्लिम वोटों का एकजुट होना एक अहम फैक्टर
असम (126 सीटें) में, मुख्यमंत्री **हिमंत बिस्वा सरमा** के नेतृत्व में BJP लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। 2015 में हिमंत के कांग्रेस छोड़कर BJP में शामिल होने के बाद, पार्टी ने 2016 में अपनी पहली सरकार बनाई (60 सीटें) और 2021 में अपने सहयोगियों के साथ सत्ता बरकरार रखी (सिर्फ़ BJP ने 60 सीटें जीतीं)। **नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA)** ने क्षेत्रीय समर्थन को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई है।

(2011 की जनगणना के अनुसार) राज्य की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग **34%** है। अगर उनके वोट कांग्रेस के पक्ष में एकजुट होते हैं या कांग्रेस और एआईएडीएमके (बद्रुद्दीन अजमल के नेतृत्व वाली) के बीच बंट जाते हैं, तो मुकाबला कड़ा हो सकता है। भाजपा कथित अवैध अप्रवासन जैसे मुद्दों को उठाती है, साथ ही अपने मुखर हिंदुत्ववादी लामबंदी और कल्याणकारी योजनाओं पर भी भरोसा करती है। जनमत सर्वेक्षण असम में एनडीए को मजबूत बढ़त का संकेत देते हैं।

तमिलनाडु: भाजपा का लक्ष्य है अपनी पकड़ मजबूत करना
तमिलनाडु की राजनीति में द्रविड़ दलों – डीएमके और एआईएडीएमके का दबदबा है। भाजपा, जिसे अक्सर “उत्तरी” पार्टी के रूप में देखा जाता है, संघर्ष कर रही है, लेकिन उसने 2021 के लोकसभा चुनावों में अपने वोट शेयर को 2.6% से बढ़ाकर 2024 के लोकसभा चुनावों में 11.2% कर लिया है। इसने 2026 के लिए फिर से एआईएडीएमके के साथ गठबंधन किया है। हालांकि, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने सीट बंटवारे (भाजपा को लगभग 27 सीटें आवंटित की गईं) पर “अत्यधिक असंतोष” व्यक्त किया है और आवंटन प्रक्रिया से असंतुष्टि का हवाला देते हुए चुनाव न लड़ने की संभावना है। पार्टी भ्रष्टाचार और परिवारवाद की राजनीति के खिलाफ आक्रामक अभियान जारी रखे हुए है।