देश के कई हिस्सों में वायु गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही है। बढ़ते धुएं, धूलकण और जहरीली गैसों के कारण वातावरण में मौजूद प्रदूषक कण फेफड़ों के भीतर तक पहुंच जाते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि प्रदूषण लंबे समय तक बना रहे, तो यह केवल खांसी या गले में खराश तक सीमित नहीं रहता, बल्कि फेफड़ों की …
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