आजकल मोबाईल फोन की घंटियां भी अजीब सी बन गई हैं, हर घंटी के ऊपर नये-नये गानों की धुन बजती है। एक आदमी के पिता की मौत हो गई, पंडित जी अन्तिम संस्कार की रसमें पूरी कर रहे थे, कि उसके मोबाईल फोन की घंटी बज उठी जिसमें से गाना बज रहा था- अज नहीयों नचना ते फिर कदों नचना। …
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