शीर्ष अदालत ने सोमवार को तमिलनाडु भाजपा प्रमुख के अन्नामलाई को राहत दी। दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय ने नफरती बयान देने के मामले में उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी। अन्नामलाई ने अक्तूबर 2022 में एक यूट्यूब चैनल को इंटरव्यू दिया था। जिसमें उन्होंने पटाखे फोड़ने को लेकर कथित तौर पर ईसाई समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
शीर्ष अदालत ने मामले पर क्या कहा
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ मामले में सुनवाई कर रही थी। पीठ ने इंटरव्यू में दिए गए बयानों की ट्रांसक्रिप्ट को देखा और कहा कि पहली नजर में यह कोई नफरत फैलाने वाला बयान नहीं है। इसमें कोई मामला नहीं बनता है। पीठ ने शिकायतकर्ता को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि दिवाली से दो दिन पहले अन्नामलाई ने 22 अक्तूबर 2022 को एक यूट्यूब चैनल को इंटरव्यू दिया, जिसमें उन्होंने पटाखे फोड़ने के मुद्दे पर ईसाई समुदाय के खिलाफ नफरती बयान दिया।
याचिकाकर्ता को नोटिस जारी करने का आदेश
शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा, 29 अप्रैल 2024 से शुरू होने वाले हफ्ते में (याचिकाकर्ता को) नोटिस जारी करें। इस बीच निचली अदालत में आगे की कार्यवाही पर रोक रहेगी। अन्नामलाई की ओर से अदालत में वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा और वकील साई दीपक पेश हुए। उन्होंने पीठ को इंटरव्यू की ट्रांसक्रिप्ट दिखाई और कहा कि यह नफरत फैलाने वाले बयान का मामला नहीं है।
अन्नामलाई ने उच्च न्यायालय के आदेश को शीर्ष अदालत में दी चुनौती
अन्नामलाई ने मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में तमिलनाडु भाजपा प्रमुख को जारी समन रद्द करने से इनकार कर दिया था। उच्च न्यायालय ने आठ फरवरी को जारी समन रद्द करने से इनकार कर दिया था।
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