ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल भारतीय नौसेना के प्राथमिक हथियार बनेगी, ये अन्य देशों से प्राप्त मिसाइलों की जगह लेगी। भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने यह दावा किया है। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि सतह से सतह पर मार करने वाले मिसाइल हथियार के रूप में अब ब्रह्मोस हमारा प्राथमिक हथियार होगा। साथ ही वायु सेना और हवाई लड़ाकू विमानों के पास भी हवा से सतह पर मार करने वाला यह प्राथमिक हथियार होगा।
नौसेना प्रमुख की यह टिप्पणी सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा 200 से अधिक ब्रह्मोस मिसाइलों के सौदे को मंजूरी देने के तुरंत बाद आई है। ये मंजूरी पांच मार्च को 19,000 करोड़ रुपये के अनुबंध के तहत 200 से अधिक ब्रह्मोस मिसाइलों के सौदे को लेकर दी गई थी। उन्होंने कहा कि ब्रम्होस की रेंज और क्षमताओं को विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके अपग्रेड होने के बाद यह हमारा मुख्य आधार बनने जा रहा है। इसी के चलते हम अपनी सभी पुरानी मिसाइलों की जगह ब्रम्होस को शामिल कर रहे हैं। इस दौरान एडमिरल ने इसके मेड इन इंडिया होने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस भारत में बनी है, इसका एक बड़ा लाभ है।
नौसेना प्रमुख ने कहा, ‘यह एक बहुत ही शक्तिशाली मिसाइल है, और यह रेंज क्षमता आदि में भी विकसित हो रही है। और एक बड़ा तथ्य यह है कि यह भारत में बना है, इसलिए हम किसी और पर निर्भर नहीं हैं। इसकी मरम्मत यही आसानी से की जा सकती है। हमारे पास ही इसके स्पेयर उपलब्ध है। इसलिए यह एक बड़ा फायदा है। नौसेना प्रमुख ने पुणे में डिफेंस एक्सपो के समापन समारोह के मौके पर यह बात कही।वे सोमवार को पुणे में डिफेंस एक्सपो पहुंचे, जहां उन्होंने विभिन्न रक्षा विनिर्माण एमएसएमई उद्योगों के विभिन्न स्टालों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भर भारत बनने के भारत के मिशन में एमएसएमई के महत्व पर भी वार्ता की।
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