दुनिया में शायद ही कोई राष्ट्रपति दूसरे देश के प्रमुख से इतनी बार मिले होंगे, जितना पुतिन और शी जिनपिंग. नई विश्व व्यवस्था में दोनों की कई बार हो रही मुलाकातें हैरान भी करती हैं और नई खबरों को जन्म भी देती हैं. पहले चीन और रूस के राष्ट्र प्रमुख अलग अलग देशों का दौरान करते थे. अब वो ज्यादातर एक दूसरे के यहां ज्यादा आते-जाते हैं.
पिछले साल मार्च में चीन के नेता शी जिनपिंग क्रेमलिन के दरवाजे पर रुके थे.तब उन्होंने पुतिन से पेशकश की थी कि विश्व व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव के लिए दोनों को मिलते जुलते रहना चाहिए. और दोनों अब यही कर रहे हैं.
अब दोनों नेता 43वीं बार मिल रहे हैं. पुतिन 16 मई को बीजिंग पहुंचे. यूक्रेन युद्ध के दौरा्न चीन और रूस का करीब आना बताता है कि अमेरिकी ताकत के खिलाफ दोनों दमदार तरीके से साथ चलना चाहते हैं. दोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत हो रहे हैं. सैन्य संबंध भी बेहतर. अमेरिका इस महीने ही दो बार चीन-रूस व्यापार पर प्रतिबंध कड़े कर चुका है. चीन और रूस दोनों इससे तिलमिलाए हुए हैं.
पुतिन हमेशा चीन की यात्रा करते हैं. 2000 में रूस का राष्ट्रपति बनने के बाद से यह उनकी 19वीं यात्रा होगी. साफ दिखाई दे रहा है कि नई विश्व व्यवस्था और यूक्रेन युद्ध के बाद से चीन और रूस ज्यादा करीब आते जा रहे हैं.
अगर देश विदेश के मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये जाहिर है कि इतनी मुलाकातों के बाद दोनों में एक अच्छी व्यक्तिगत केमिस्ट्री बन चुकी है. दोनों इसे मुलाकात के दौरान बॉडी लेंग्वेज में दिखाते भी हैं. दोनों करीब एक ही उम्र के हैं. पुतिन 71 साल के हैं तो जिनपिंग 70 सालों के. हालांकि सत्ता में पुतिन सीनियर हैं, वह 1999 में सत्ता में आए थे तो शी जिनपिंग 2012 में .
दोनों ने ही सत्ता में बने रहने के लिए उन नियमों को अस्वीकार कर दिया, जो उनकी राह में आड़े आते थे. फिर इस तरह के कानून बनाए कि सत्ता पर उनकी पकड़ निर्विवाद तौर पर मजबूत हो गई. दोनों ने विपक्षियों को निर्ममता से कुचला. पुतिन ने हाल ही फिर चुनाव जीता है हालांकि इस चुनाव में अनियमितताओं के काफी आरोप हैं वहीं शी जिनपिंग पिछले साल नवंबर में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की 20वीं कांग्रेस के दौरान फिर से चुने गए. दोनों ने अपना संभावित उत्तराधिकारी तैयार करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है.
दोनों ही संयुक्त राज्य अमेरिका, नाटो, जापान को अपना कॉमन दुश्मन मानते हैं. दोनों को एक ही डर है कि अमेरिका उनके यहां लोकतांत्रिक विद्रोह कर सकता है. पुतिन और शी दोनों ही अपने तरीके मजबूत आंतरिक दमन सिस्टम चलाते हैं.
दोनों के ही दुनिया की दूसरी और तीसरी सबसे बड़ी सैन्य ताकतें हैं. रूस के पास बड़ी संख्या में परमाणु हथियार हैं. चीन के पास बहुत कम परमाणु हथियार हैं, लेकिन अधिक आधुनिक पारंपरिक हथियार बड़ी संख्या में हैं.
पुतिन और शी दोनों ही अतीत में अपने देशों द्वारा झेले गए अपमान के बारे में शिकायत करते हैं. वो खोए हुए क्षेत्रों को फिर हासिल करना अपना मिशन मानते हैं. यदि दोनों देशों में अल्पसंख्यक समूह राजनीतिक स्वशासन की मांग करते हैं तो उन्हें गंभीर दमन का सामना करना पड़ता है.
अपने करियर की शुरुआत में पुतिन केजीबी में एक ख़ुफ़िया अधिकारी थे और शी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में मजबूती से आगे बढ़कर यहां तक पहुंचे. पुतिन के देश में हालांकि कई पार्टियां हैं लेकिन वो ये सुनिश्चित करते हैं कि कोई दूसरी पार्टी देश में मजबूत नहीं हो पाए. वहीं शी व्यवस्थित रूप से निर्मित एकदलीय राज्य पर शासन करते हैं. उन्होंने सरकार, व्यवसाय, स्कूलों और विश्वविद्यालयों पर कम्युनिस्ट पार्टी की पकड़ मजबूत कर दी है.
दोनों के शौक एकदम अलग अलग हैं. जहां पुतिन को निशानेबाजी, घुड़सवारी, निशानेबाजी, तैराकी और मछली पकड़ना अच्छा लगता है तो शी जिनपिंग अपने इंटरव्यू में कह चुके हैं कि उन्हें पढ़ना बहुत अच्छा लगता है और ये हॉबी उनकी युवावस्था से ही बनी हुई है. उन्हें भारतीय रविंद्रनाथ टैगोर की कविताओं को भी पढ़ना बहुत अच्छा लगता है.
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