प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अयोध्या दौरा कई मायनों में अभूतपूर्व रहा। राम मंदिर में पांच साल के रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद प्रधानमंत्री ने करीब 36 मिनट तक पूरे देशवासियों को संबोधित किया। उन्होंने ‘देव से देश’ और ‘राम से राष्ट्र’ थीम पर आधारित प्रेरक संदेश दिया। पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान भगवान राम और गिलहरी के संवाद का जिक्र करते हुए देशवासियों को बड़ा संदेश दिया। उन्होंने लोकश्रुति और आस्था से जुड़ी इस प्रेरक कहानी के जरिए खुद के योगदान को कम न आंकने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि गिलहरी और भगवान राम का संवाद हमें बताता है कि सकारात्मक सोच और प्रयास हमेशा जारी रहने चाहिए।
84 मिनट की विशेष पूजा के बाद पारलौकिक दिव्यता का जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद देश में आज से एक नए युग का आरंभ हो गया है। वैदिक पद्धति और पूरे विधि-विधान के साथ पीएम मोदी के नेतृत्व में भगवान के बाल रूप की प्राण प्रतिष्ठा हुई। राम मंदिर के गर्भगृह में पीएम मोदी ने 84 मिनट तक चली पूजा संपन्न की। पूजा-अनुष्ठान के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, आज देश में निराशावाद की जगह नहीं है। अगर कोई यह सोचे कि मैं सामान्य और छोटा हूं तो उसे गिलहरी को याद करना चाहिए। यह सिखाएगा कि छोटे-बड़े हर प्रयास की ताकत होती है, योगदान होता है। यही भावना समर्थ, सक्षम, भव्य, दिव्य भारत का आधार बनेगी।
भगवान राम और गिलहरी की कहानी; राम सेतु से जुड़ा है प्रसंग
समय में बदलाव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के साथ अब कालचक्र फिर बदलेगा और शुभ दिशा की ओर बढ़ेगा। इस दौरान उन्होंने रामसेतु के निर्माण का भी जिक्र करते हुए कहा कि आज देश में निराशावाद के लिए जगह नहीं है। देश के विकास में सभी से योगदान का आह्वान करते हुए पीएम मोदी ने रामसेतु के निर्माण में छोटी सी गिलहरी के योगदान की भी चर्चा की। हम आपको बताएंगे कि वो कहानी क्या थी….
लहरी और भगवान राम के संवाद की प्रेरक कहानी
रामकथा के रचयिता ने खुद कहा है कि रामायण शतकोटि अपारा। यानी राम कथा केवल एक नहीं, इसके अनेक संस्करण हैं। श्रुति परंपरा वाले देश भारत में भगवान राम से जुड़े कई ऐसे ही प्रसंग हैं जो देश-काल और सरहदों की सीमाओं से परे पूरी मानवता को रोमांचित के साथ-साथ प्रेरित भी करते हैं। गिलहरी और भगवान राम के संवाद की ये कहानी रामेश्वरम की है। लंकापति रावण से धर्मयुद्ध करने से पहले जब भगवान राम की वानरसेना रामसेतु बना रही थी उसी समय मर्यादा पुरुषोत्तम राम की नजर एक गिलहरी पर पड़ी। वह अपनी क्षमता के मुताबिक छोटे कंकर रामसेतु निर्माण में लगे श्रमिकों को दे रही थी।
गिलहरी ने भगवान राम के कठिन सवालों पर क्या जवाब दिया
गिलहरी के ऐसा करने पर हैरत से भरे भगवान राम ने उससे सवाल किया। उन्होंने पूछा कि वह कंकरों को रामसेतु में क्यों डाल रही है? इसके पीछे सोच क्या है? बड़ी शिलाओं के बीच उसके कंकरों की क्या अहमियत होगी? तमाम सवालों पर गिलहरी ने बिना किसी संकोच और पूरे आत्मविश्वास से जवाब दिया। गिलहरी ने सियावर राम से कहा कि भले ही उसका योगदान आकार की दृष्टि से बेहद लघु दिख रहा है, लेकिन नीयत के नजरिए से वह अपनी पूरी क्षमता से योगदान कर रही है। अहमियत योगदान और श्रम की मात्रा या रामसेतु में डाले जा रही शिलाओं की भी है, लेकिन उसकी सोच सकारात्मक भूमिका निभाने की है। उसके इस जवाब से भगवान राम काफी प्रसन्न हुए। एक मान्यता ऐसी भी है कि गिलहरी की पीठ पर मौजूद धारियां भगवान राम की तीन अंगुलियों के निशान हैं।
महातपस्विनी शबरी के दृढ़ भरोसे का भी जिक्र
राममंदिर में पहली पूजा के बाद देशवासियों को अयोध्या की दिव्यता के दर्शन कराते हुए प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे रामलला अब टेंट में नहीं रहेंगे। हमारे रामलला अब दिव्य मंदिर में रहेंगे। 22 जनवरी 2024 का यह सूर्य अद्भुत आभा लेकर आया। आज दिन-दिशाएं, दिग-दिगंत, सब दिव्यता से परिपूर्ण हैं। पीएम मोदी कहा, आदिवासी मां शबरी कब से कहती थी- राम आएंगे। प्रत्येक भारतीय में जन्मा यही विश्वास समर्थ, सक्षम, भव्य भारत का आधार बनेगा। रामकथा के प्रसंगों की व्याख्या करने वाले संतों ने मां शबरी को महातपस्विनी क संज्ञा भी दी है। प्रधानमंत्री ने कहा, हम सब जानते हैं कि निषाद राज की मित्रता सभी बंधनों से परे है। उनका अपनापन कितना मौलिक है। सब अपने हैं, सभी समान हैं। सभी भारतीयों में अपनत्व की भावना नए भारत का आधार बनेगी। यही देव से देश और राम से राष्ट्र की चेतना का विस्तार है।
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