महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों अनपेक्षित समीकरण देखने को मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने जन्मदिन पर जारी की गई कॉफी टेबल बुक में विरोधी दलों के दो प्रमुख नेताओं — शरद पवार और उद्धव ठाकरे की खुले दिल से तारीफ कर सबको चौंका दिया। उनका यह बयान कि “हम वैचारिक रूप से विरोधी हैं, दुश्मन नहीं,” राज्य की राजनीति में संवाद और सम्मान के नए द्वार खोलता नजर आ रहा है।
शरद पवार की ओर से तारीफ, लेकिन संकेत भी?
84 वर्षीय एनसीपी (शरद पवार गुट) प्रमुख शरद पवार ने अपने लेख में फडणवीस को ऊर्जावान और प्रशासनिक रूप से मजबूत नेता बताया। उन्होंने 1978 में खुद के मुख्यमंत्री बनने की याद ताजा करते हुए फडणवीस की तुलना अपने शुरुआती राजनीतिक सफर से की। मजाकिया लहजे में उन्होंने कहा,
“भारी शरीर कभी कड़ी मेहनत की राह में बाधा नहीं बना। मुझे आश्चर्य है कि फडणवीस थकते नहीं।”
राजनीतिक जानकार इसे इशारा मान रहे हैं कि पवार, फडणवीस को एक बड़ी भूमिका में देखते हैं — संभवतः राष्ट्रीय स्तर पर।
उद्धव ठाकरे ने भी दिया समर्थन
शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने फडणवीस को “अध्ययनशील और समर्पित राजनेता” बताया। उन्होंने माना कि फडणवीस ने एक ऐसे राज्य में बीजेपी को मजबूत किया है जो कभी कांग्रेस का गढ़ था। उद्धव ने यह भी लिखा कि फडणवीस के पास राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने का अवसर है।
राजनीति के बदलते संकेत
यह नया समीकरण तब उभर कर आया है जब हाल ही में फडणवीस ने विधान भवन में उद्धव की वापसी पर सकारात्मक बयान दिया था। इसके बाद दोनों नेताओं के बीच संवाद भी हुआ। वहीं विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच की शब्दों की तल्ख़ी कम होती नजर आ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह मेलजोल महाराष्ट्र में किसी नई राजनीतिक रणनीति की ओर इशारा करता है। आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले यह “राजनीतिक आइसब्रेकिंग” महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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