सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत: NCR में फ्लैट धोखाधड़ी के 22 मामलों की CBI जांच को मंजूरी, 1200 से ज़्यादा घर खरीदारों को उम्मीद

दिल्ली-एनसीआर के हजारों घर खरीदारों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। देश की सर्वोच्च अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को फ्लैट खरीदने वालों के साथ धोखाधड़ी के 22 मामलों की FIR दर्ज करने की अनुमति दे दी है। ये मामले उन बिल्डरों और बैंकों के खिलाफ हैं, जिन्होंने सबवेंशन स्कीम के नाम पर घर खरीदारों को ठगा और लाखों की वसूली की।

बैंक-बिल्डर की साठगांठ का खुलासा
CBI की जांच में सामने आया है कि कई बैंकों और बिल्डरों ने त्रिपक्षीय समझौते (Tripartite Agreement) के नाम पर घर खरीदारों को आकर्षित किया। सबवेंशन स्कीम के तहत बिल्डर यह वादा करते हैं कि जब तक फ्लैट का कब्जा नहीं मिलेगा, ईएमआई वे खुद भरेंगे। लेकिन, कब्जा दिए बिना ही बिल्डरों ने ईएमआई भरना बंद कर दिया और बैंक अब घर खरीदारों से पैसे वसूलने में जुटे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई को 6 हफ्तों का और समय दिया है। पीठ ने कहा कि जांच की गति और गंभीरता संतोषजनक है, लेकिन और गहराई से पड़ताल जरूरी है। साथ ही, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के विकास प्राधिकरणों की भूमिका की भी जांच हो रही है।

1200 से अधिक याचिकाएं, हजारों प्रभावित परिवार
सुप्रीम कोर्ट में 1200 से ज़्यादा याचिकाएं दाखिल हुई हैं। इनमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, यमुना एक्सप्रेसवे और गाजियाबाद के प्रोजेक्ट्स शामिल हैं। खरीदारों का आरोप है कि वे फ्लैट के बिना भी EMI भरने को मजबूर हैं, जिससे वित्तीय संकट और मानसिक तनाव बढ़ा है।

निचली अदालतों की अनदेखी पर नाराजगी
पिछले साल कोर्ट ने साफ निर्देश दिया था कि जब तक मामला लंबित है, कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो। लेकिन वकीलों ने बताया कि गुड़गांव की अदालतें अभी भी खरीदारों के खिलाफ आदेश दे रही हैं। इस पर कोर्ट ने गुड़गांव के जिला न्यायाधीश को 10 दिन में रिपोर्ट देने का आदेश दिया है।

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