प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को 21.8 किलोमीटर लंबे अटल बिहारी वाजपेयी सेवारी-न्हावा शेवा अटल सेतु समुद्री संपर्क का उद्घाटन किया। इसे लेकर भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के वरिष्ठ अधिकारी संजय खंडारे ने कहा कि यह उनके लिए संजो कर रख लेने वाला क्षण है क्योंकि उन्होंने चार साल के लिए परियोजना का नेतृत्व किया है।
महाराष्ट्र कैडर के 1996 बैच के आईएएस अधिकारी खंडारे मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) के तत्कालीन अतिरिक्त मेट्रोपॉलिटन आयुक्त के रूप में फरवरी 2020 तक चार साल के लिए महत्वाकांक्षी परियोजना के प्रभारी थे। उस समय इसे मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक के नाम से जाना जाता था।
अब राज्य सरकार के जल आपूर्ति एवं स्वच्छता विभाग के प्रधाव सचिव खंडारे ने कहा,”यह सिर्फ इस्पात और कंक्रीट का नहीं बल्कि संभावनाओं का पुल है। यह मुंबई और भारत के लिए आर्थिक विकास और उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करता है।”वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि परियोजना के प्रारंभिक चरण में समुद्र के नीचे बिछी हुई तेल के पाइपों, समुद्री संपर्क के दोनों सिरों पर भूमि अधिग्रहण, इंजीनियरिंग डिजाइन और निविदा एवं निष्पादन प्रक्रियाओं का सामना करना था।
अतुल सेतु का निर्माण कुल 17,480 करोड़ रुपये की लागत से हुआ है। छह लेन का यह पुल 21.8 किमी लंबा है और 16.5 किमी लंबा सी-लिंक है। अटल सेतु भारत का सबसे लंबा पुल होने के साथ ही देश का सबसे लंबा समुद्री पुल भी है।यह पुल आगामी नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए तेज कनेक्टिविटी प्रदान करेगा और मुंबई तथा पुणे के बीच यात्रा के समय को कम करेगा। इससे मुंबई से गोवा और दक्षिण भारत की यात्रा में भी कम समय लगेगा।
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