भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव एवं इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष राम माधव ने कहा है कि नेपाल में पिछले कुछ दिनों से हिंदू राष्ट्र के समर्थन में चल रहे आंदोलन को भारत के साथ जोड़कर देखना ठीक नहीं है। नेपाल भारत अंतरराष्ट्रीय संस्कृत सम्मेलन के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि राम माधव ने शनिवार को कहा कि नेपाल के कुछ राजनीतिक दल अपना राजनीतिक स्वार्थ पूरा करने के लिए हिंदू राष्ट्र के आंदोलन के पीछे भारत की योजना देख रहे हैं,।
जबकि इसमें भारत की कोई योजना नहीं है। नेपाल में क्या होना है, कैसे होना है और कब होना है, यह नेपाल की जनता तय करेगी। भारत नेपाली जनता के फैसले के पक्ष में हमेशा से रहा है और आगे भी रहेगा।नीति अनुसंधान प्रतिष्ठान नेपाल और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के साथ इंडिया फाउंडेशन की तरफ से आयोजित सम्मेलन में राम माधव ने कहा कि नेपाल एक लोकतांत्रिक देश है। नेपाल में कैसी शासन व्यवस्था होगी।
यह नेपाल की जनता तय करेगी। भारत इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा। यदि नेपाल चाहेगा तो भारत उसके सहयोग के लिए हमेशा तैयार है। संस्कृत को नेपाल भारत की साझा विरासत बताते हुए राम माधव ने कहा कि इस पर दोनों देशों को मिलकर काम करने की जरूरत है। नेपाल और भारत के बीच साझा सभ्यता, साझा संस्कृति और साझी भाषा के लिए संयुक्त रूप से मिल कर काम करना चाहिए। उन्होंने यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा कि कई साझा मुद्दों पर यूरोप के 26-27 देश मिल कर अपनी समस्या का समाधान करते हैं। इसी तरह नेपाल और भारत को साझा मुद्दों पर काम करना चाहिए।
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