गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज इनको कौन नहीं जानता है इस्कॉन के वरिष्ठ संन्यासियों में से एक और इस्कॉन इंडिया की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष भी रह चुके है इन स्वामी जी महाराज का निधन हो गया है। देहरादून में रविवार सुबह गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज का निधन हो गया। उनके निधन की खबर सुनते ही उनके भक्तों के साथ साथ वृंदावन के धाम सहित मंदिरों में भी सभी जगह शोक की लहर है। गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज का पार्थिव शरीर सोमवार को वृंदावन लाया जाएगा। इस्कॉन मंदिर में अंतिम दर्शन को सुबह 11 बजे से उनका पार्थिव शरीर रखा जाएगा। इस्कॉन की गोशाला के पास करीब दोपहर 2.30 बजे समाधि दी जाएगी।गोपाल कृष्ण गोस्वामी 1944 में दिल्ली में जन्मे थे।
इनकी छवि एक मेधावी छात्र की रही थी इनको सोरबोन विश्वविद्यालय और मैकगिल विश्वविद्यालय में अध्ययन करने के लिए दो छात्रवृत्तियां भी प्रदान की जा चुकी है। 1968 में कनाडा में अपने गुरु आचार्य श्रील प्रभुपाद से मुलाकात के बाद ही शांति और कल्याण के लिए भगवान कृष्ण और सनातन धर्म की शिक्षाओं को दुनिया के साथ साझा करने के लिए खुद का पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
वृंदावन के पदाधिकारी बृजधाम दास की जानकारी के अनुसार उनके लाखों भक्त अंतिम दर्शन के लिए वृंदावन के इस्कॉन मंदिर में जरूर ही आएंगे। भक्तों में उनके निधन के समाचार की वजह से शोक की लहर छाई हुई है। जानकारी से पता चला है की गोपाल कृष्ण गोस्वामी महाराज 2 मई को मंदिर के शिलान्यास के कार्यक्रम में दूधली गए थे यहां पर अचानक फिसलकर वो गिर गए थे। जिस वजह से फेफड़ों में पंक्चर का पता चला उसके बाद से ही तीन दिनों से उनका इलाज वहा के सिनर्जी अस्पताल में चल रहा था। रविवार की सुबह उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली।
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