जयपुर, 25 सितंबर 2026। आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी में ‘स्वामी विवेकानंद फॉर आवर टाइम्स’ पुस्तक पर विशेष बुक टॉक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डिप्लोमैट एवं स्कॉलर एंबेसडर राजीव सिकरी ने हिस्सा लिया। उन्होंने पुस्तक के संपादन और संकलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों, फैकल्टी सदस्यों और अकादमिक समुदाय से जुड़े प्रतिभागियों ने स्वामी विवेकानंद के विचारों तथा वर्तमान भारत और वैश्विक परिदृश्य में उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा की।
कार्यक्रम का संचालन आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट के सदस्य एंबेसडर सतीश सी. मेहता ने किया। इस अवसर पर आईआईएचएमआर के फाउंडर ट्रस्टी डॉ. अशोक अग्रवाल और आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट डॉ. पी.आर. सोडानी भी मौजूद रहे।
बदलती दुनिया में विवेकानंद के विचारों की प्रासंगिकता पर चर्चा
‘स्वामी विवेकानंद फॉर आवर टाइम्स’ पुस्तक में तेजी से बदलती दुनिया की चुनौतियों के संदर्भ में स्वामी विवेकानंद के दर्शन और दृष्टिकोण की प्रासंगिकता पर चर्चा की गई है। बुक टॉक के दौरान राष्ट्र निर्माण, व्यक्तिगत विकास, सामाजिक जिम्मेदारी और वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका से जुड़े उनके विचारों पर विस्तार से चर्चा हुई।
प्रतिभागियों ने इस बात पर भी विचार किया कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज के समाज के लिए किस प्रकार व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत कर सकते हैं और बदलते सामाजिक एवं वैश्विक परिवेश में उन्हें किस तरह समझा जा सकता है।
युवाओं, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण पर संवाद
आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट डॉ. पी.आर. सोडानी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी प्रासंगिक हैं, क्योंकि वे समाज से जुड़े ऐसे विषयों पर विचार प्रस्तुत करते हैं जो वर्तमान समय में भी महत्वपूर्ण हैं। इनमें अपनी क्षमताओं का विकास, जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना शामिल है।
उन्होंने कहा कि जब भारत सामाजिक, आर्थिक और वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलावों के दौर से गुजर रहा है, तब स्वामी विवेकानंद के विचारों से जुड़ना उन मूल्यों पर विचार करने का अवसर देता है, जो देश की विकास यात्रा को दिशा देने में उपयोगी हो सकते हैं।
भारतीय सभ्यता और वैश्विक परिदृश्य पर विद्यार्थियों की चर्चा
सेशन के दौरान विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों को भारत की सभ्यतागत सोच, नेतृत्व, सामाजिक परिवर्तन तथा बदलते वैश्विक परिवेश में भारत की आकांक्षाओं से जुड़े विषयों पर संवाद का अवसर मिला।
चर्चा में इस बात पर भी जोर दिया गया कि बुनियादी विचारों को नए संदर्भों में समझना और वर्तमान सामाजिक एवं वैश्विक चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में उनकी पुनर्व्याख्या करना आवश्यक है।
राजीव सिकरी ने साझा किया राजनयिक अनुभव
वर्ष 1970 में भारतीय विदेश सेवा से जुड़े एंबेसडर राजीव सिकरी ने पुस्तक और स्वामी विवेकानंद के विचारों की निरंतर प्रासंगिकता पर चर्चा के दौरान अपने लंबे राजनयिक अनुभव और अध्ययन का संदर्भ दिया।
तीन दशकों से अधिक लंबे राजनयिक करियर के दौरान उन्होंने मॉस्को, न्यूयॉर्क, पेरिस और काठमांडू में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वे कजाकिस्तान में भारत के राजदूत भी रहे। इसके अलावा उन्होंने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में सचिव के रूप में भी सेवाएं दीं और बाद में सेवानिवृत्त हुए।
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check