गुड्स एंड सर्विसेज से जुड़े विवादों का निपटारा अभ आसानी से किया जा सकेगा. जस्टिस (रिटायर्ड) संजय मिश्रा ने जीएसटी अपलेट ट्रिब्यूनल के पहले प्रेसीडेंट के तौर पर शपथ ले लिया है. वित्त मंत्री और कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने जस्टिस मिश्रा को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई है. जस्टिस (रिटायर्ड) संजय मिश्रा की प्रेसीडेंट पद पर नियुक्ति के साथ ही जीएसटीएटी अस्तित्व में आ गया है और अब जीएसटी से जुड़ी विवादित मामलों का निपटारा किया जा सकेगा.
जीएसटीएटी एक अपेलट अथॉरिटी है जिसे गुड्स एंड सर्विसेज एक्ट 2017 के तहत बनाया गया है जो जीएसटी एक्ट के साथ राज्यों और केंद्र शाषित प्रदेशों के एक्ट पर पहले अपलेट अथॉरिटी के आदेश के खिलाफ की गई अपीलों पर सुनवाई करेगी. इसमें प्रिंसपल बेंच के अलावा राज्यों के बेंच शामिल होंगे. जीएसटी काउंसिल की सहमति के मुताबिक प्रिसिंपल बेंच नई दिल्ली में होगी और 31 राज्यों के बेंच देश में अलग अलग लोकेशन पर होंगे जिसे सरकार ने नोटिफाई कर दिया है. जुडिशियल मेंबर्स और टेक्निकल मेंबर्स की नियुक्ति का प्रोसेस जारी है.
जीएसटीएटी अपलेट ट्रिब्यूनल के अस्तित्व में आने के बाद जल्दी, निष्पक्ष, विवेकपूर्ण और प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा. साथ ही उच्च न्यायालयों पर बोझ को कम किया जा सकेगा. जीएसटीएटी की स्थापना के बाद देश में जीएसटी सिस्टम और प्रभावी होगी साथ ही देश में अधिक पारदर्शी और कुशल टैक्स वातावरण तैयार किया जा सकेगा. जस्टिस (रिटायर्ड) संजय मिश्रा जीएसटीएटी के पहले प्रेसीडेंट बनने से पहले झारखंड हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश थे.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, जीएसटी के ढांचे में दो प्रमुख उपलब्धियां हासिल हुई है. जीएसटीएटी के पहले प्रेसीडेंट की नियुक्ति हो गई है साथ ही आर्थिक गतिविधि में तेजी के चलते जीएसटी कलेक्शन 2 लाख करोड़ रुपये के पार जा पहुंचा है.
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