छत्तीसगढ़ से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक जंग का ऐलान करते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि 2026 तक भारत को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाएगा।
अमित शाह ने स्पष्ट किया कि इस बार नक्सलियों को बारिश में भी राहत नहीं मिलेगी। अब मौसम के आधार पर ऑपरेशन नहीं रोका जाएगा। हमारी सुरक्षाबल पूरी तैयारी के साथ मैदान में हैं और ये लड़ाई अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है।
☔ अब मानसून में भी नहीं मिलेगी पनाह
गृह मंत्री ने कहा कि पहले नक्सली मानसून के दौरान जंगलों और दुर्गम इलाकों में छिप जाते थे, लेकिन अब उन्हें कहीं चैन नहीं मिलेगा। उन्होंने दो टूक कहा,
“अब चर्चा की कोई ज़रूरत नहीं है। नक्सली हथियार डालें, आत्मसमर्पण करें – यही उनके लिए सबसे अच्छा विकल्प है।”
🤝 “अब भी वक्त है – हिंसा छोड़ें, विकास से जुड़ें”
अमित शाह ने छत्तीसगढ़ सरकार की नई सरेंडर नीति की सराहना करते हुए कहा कि जो नक्सली मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए यह सुनहरा अवसर है। इस नीति से उन्हें सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य मिल सकता है।
उन्होंने अपील की,
“हिंसा छोड़िए, भारत की विकास यात्रा में साझेदार बनिए।”
🏗️ विकास और न्याय ही असली सुरक्षा
अपने संबोधन में शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “विकसित भारत” की सोच को रेखांकित करते हुए कहा कि
“विकास सिर्फ सड़कें और तकनीक नहीं है, बल्कि न्याय, सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता भी उतनी ही ज़रूरी है।”
नक्सलवाद को खत्म करके ही वास्तविक प्रगति संभव है।
🚧 नक्सलियों की जमीन खिसक रही है
पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने सुरक्षा बलों की तैनाती, सड़कों का विस्तार, संचार नेटवर्क, और स्वास्थ्य व शिक्षा सुविधाएं बढ़ाकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। इससे नक्सलियों का जनाधार कमजोर हुआ है और कई इलाके नक्सल-मुक्त हो चुके हैं।
अमित शाह ने विश्वास जताया कि यदि इसी रफ्तार और सहयोग से काम होता रहा, तो 31 मार्च 2026 से पहले ही नक्सलवाद खत्म हो सकता है।
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