आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक नई टेक्नोलॉजी है जोकि विकास की ओर अग्रसर करने में मुख्य भूमिका निभा रही है। AI के द्वारा चलने वाले चैटबॉट, जिनमें ओपन एआई का चैट जीपीटी चैटबॉट भी शामिल है।चैटबॉट और AI असिस्टेंट स्वास्थ्य से जुड़ी गलत जानकारी साझा कर रहे है और इसको देने से रोकने के लिए सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं।
ChatGPT एक एआई टूल है। इस एआई टूल का इस्तेमाल बड़े लेवल पर किया जा रहा है। ये कई प्रकार नोट्स बनाने के साथ साथ कैनोर्फकर के डाइट प्लान बना रहा है। देखा जाए तो ChatGPT जैसे टूल का का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कस्टमर सपोर्ट में हो रहा है, होशियार लोगों की बात की जाए तो ज्यादातर लोग टेक्नोलॉजी का यूज करते हुए अपनी बीमारियों के लिए भी ChatGPT से राय लेने में लगे हुए है। अब लोग अपनी बीमारी की समस्या का विवरण ChatGPT से बता रहे हैं और फिर उसके द्वारा दिए गए सुझाव के अनुसार पर दवाई ले रहे हैं, क्या ये कर्म सही है की जीनहीं इसका सीधा असर हमारी सेहत पर पड़ेगा। जरूरी नहीं की जो भी हम इनफॉर्मेशन प्राप्त कर रहे है वो सही हो। इसके अनुसार कुछ भी करना हमारी सेहत के लिए बहुत ही खतरनाक हो सकता है। एक्सपर्ट ने भी इसको लेकर लोगों को आगाह किया है।
चैटजीपीटी इस्तेमाल जांच के घेरे में आया है। लॉन्ग आइलैंड यूनिवर्सिटी में कुछ फार्मासिस्टों द्वारा किए गए एक अध्ययन में दवा से संबंधित सवालों के जवाबों के लिए चैटजीपीटी इस्तेमाल किया गया था। इस यूरी प्रक्रिया में पाया गया कि कि चैटबॉट और चैटजीपीटी, दवा के तीन-चौथाई प्रश्नों के गलत और अधूरे उत्तर दे रहा है। इस अध्यन के बाद ये बात साबित हो गई है की कि चैटबॉट बनाने वाली कंपनियों ने अभी तक सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के लिए किसी प्रकार की कोई भी तैयारी नही की है।
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