जीरा का हम प्राचीन काल से उपयोग करते आ रहे है ,यह हमारे रसोई में बहुत आसानी से मिल जाता है | पेट के गैस को दूर करनेवाला जीरा अति प्रभावकारी है. बुख़ार में इसका सेवन करने से शरीर की जलन व पेशाब की वेदना कम होती है. जीरा को कई बीमारियों में घरेलू औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है.आइये जानते है इसके बारे में विस्तार से :-
जीरा के घरेलू नुस्ख़े:-
बुख़ार होने पर 50 ग्राम जीरा गुड़ में अच्छी तरह मिलाकर 10-10 ग्राम की गोलियां बना लें. 1-1 गोली दिन में 3 बार सेवन करने से पसीना आता है और शरीर का बढ़ा हुआ ताप कम होता है. इससे पुराना बुख़ार भी ठीक हो जाता है.
जीरे का चूर्ण 5 से 10 ग्राम की मात्रा में मूंग के साथ दिन में 2 बार सेवन करने से पुराना अतिसार कुछ दिनों में दूर हो जाता है.
भोजन के प्रति अरुचि हो, भूख न लगती हो, तो 1 ग्राम भुने हुए जीरे का चूर्ण 15 ग्राम अनारके रस में मिलाकर सेवन करने से लाभ होता है.
जीरा, सोंठ, पिप्पली, कालीमिर्च और सेंधा नमक- सभी को समान मात्रा में लेकर बारीक़ चूर्ण बनाकर रख लें. इसकी 3 से 6 ग्राम मात्रा दिन में दो बार शहद के साथ सेवन करने से पेटदर्द और पेट संबंधी समस्याएं दूर होती हैं.
बवासीर की वेदनापूर्ण सूजन में इसे मिश्री के साथ देने और जीरे को पानी के साथ पीसकर लेप की तरह लगाने से विशेष लाभ होता है.
जीरा, जायफल और बेल के गूदे को समान भाग में लेकर चूने के पानी के साथ पीसकर छोटी-छोटी गोलियां बना लें. इसकी 1-1 गोली दिन में तीन बार चावल के पानी के साथ लेने से पेचिश (आंव) से छुटकारा मिलता है.
छोटे बच्चों को उल्टी होने पर आंवला, जीरा, लौंग, कालीमिर्च और शक्कर सभी को सममात्रा में लेकर चूर्ण बना लें. इसे शहद के साथ अवस्थानुसार दिन में तीन बार दें. इससे बच्चों को होनेवाली उल्टी ठीक हो जाती है.
खूनी पेचिश होने पर जीरे के चूर्ण को 2 से 5 ग्राम की मात्रा में लेकर 250 ग्राम मट्ठे में मिलाकर दिन में 2-3 बार पीने से लाभ होता है.
जीरे को घी में डुबोकर उसे चिलम में भरकर धूम्रपान करने से हिचकी बंद हो जाती है.
जीरे का चूर्ण और नमक शहद में मिलाकर हल्का गर्म करके बिच्छू के डंक पर लगाने से उसका विष उतर जाता है.
जीरे को नींबू के रस में मिलाकर उसमें अंदाज़ से नमक मिलाकर खटाई जीरा बना लें. यह जीरा गर्भवती महिला को देने से उसका जी मिचलाना बंद हो जाता है.
जीरा, त्रिकुट, भुनी हुई हींग और काला नमक- सभी को समभाग लेकर चूर्ण बनाकर रख लें. इसे 1 से 3 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार दही के पानी के साथ सेवन करने से मोटापा कम होता है.
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