देश का मासिक इस्पात निर्यात जनवरी, 2024 में 11 लाख टन के 18 माह के उच्चस्तर पर पहुंच गया है। ‘स्टीलमिंट’ ने यह जानकारी देते हुए कहा कि यूरोपीय संघ की मांग बढ़ने और वैश्विक स्तर पर अनुकूल कीमतों की वजह से इस्पात निर्यात का आंकड़ा अच्छा रहा है।
शोध कंपनी स्टीलमिंट की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके अलावा घरेलू स्तर पर प्रतिस्पर्धी कीमतों ने निर्यात वृद्धि में योगदान दिया है। जनवरी, 2023 में इस्पात का निर्यात 6.7 लाख टन रहा था।निर्यात में वृद्धि के कारणों पर स्टीलमिंट ने कहा, ”यूरोपीय संघ (ईयू) की भंडार को भरने की मांग ने जनवरी में कुल निर्यात में 67 प्रतिशत का योगदान दिया है। यह पिछले 18 माह का सबसे ऊंचा आंकड़ा है।”
देश में हॉट रोल्ड कॉइल (एचआरसी) की कीमत जहां 54,300 रुपये प्रति टन थी, वहीं वैश्विक स्तर पर यह 710 डॉलर (लगभग 58,000 रुपये) प्रति टन थी। इस कारक ने भी वैश्विक स्तर पर इस्पात की मांग में योगदान दिया।स्टीलमिंट ने कहा, ”चीन में छुट्टियों तथा वियतनाम में त्योहार की वजह से निकट भविष्य में कुल मिलाकर भारतीय इस्पात निर्यात काफी हद तक सीमित दायरे में रह सकता है या इसमें थोड़ी गिरावट आ सकती है।”
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