अस्थमा की बीमारी से इंसान को सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होती हैं।अस्थमा में में सांस की नलिकाएं प्रभावित होती हैं। ये नलिकाएं फेफड़ो से हवा अंदर बाहर करने का काम करती हैं। अस्थमा होने पर नलकियों में सूजन आ जाती हैं, इससे नलिकाएं संकरी व संवेदनशील हो जाती हैं और सांस लेने पर कम हवा फेफड़ो तक पहुंचती है।यह बीमारी एलेर्जी के कारण बढ़ जाती है। तो आइये जानते है इसके बारे में विस्तार से।
१- बरसात आते ही अस्थमा के मरीजों में 20 से 25 प्रतिशत का इजाफा हो जाता है। डॉक्टर के अनुसार ऐसा मौसम बदलने के कारण होता हैं,दरअसल अस्थमा का कारण इन्फेक्शन भी होता हैं|
२- इस बीमारी से बच्चे ज्यादा जल्दी शिकार होते हैं, बढ़ रहा प्रदूषण बच्चो को इसका शिकार बना रहा हैं, समय पर और नियमित उपचार व परहेज करने से इसके असर को नियंत्रित कर सकते हैं।
३- सर्दी और गर्मी दोनों में व्यक्ति अस्थमा का शिकार हो सकता है इस मौसम में एयर कंडीशन या अन्य माध्यम से व्यक्ति गर्म से एकाएक ठंड या ठंड से एकाएक गर्म मे जाने से एलर्जी होती है।
४- बाहर धुप से घर आने पे बच्चे ज़्यदातर ठंडा पानी पी लेते हैं, ठंडी चीजे जैसे आइसक्रीम, कोल्ड्रिंक व अन्य चीजें खा लेते हैं। गर्मी में ठंडी चीजे खाने की वजह से बच्चो को खासी, इन्फेक्शन ज्यादा हो रहा हैं, सामान्य बच्चों की अपेक्षा इन्फेक्शन होने पर अस्थमा पेशेंट को सांस लेने में काफी दिक्कते आती हैं, दिन में कई बार स्प्रे लेना पड़ता हैं, और बारिशो में अस्थमा ज्यादा बढ़ जाता हैं।
अस्थमा की समस्या से कैसे करे बचाव:-
बच्चों को गर्मी से बचाएं।
अस्थमा की दवाएं हमेशा साथ लेकर चलें।
इंफेक्शन होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
इमर्जेंसी दवाएं भी साथ रखें।
धूप से आने पर तुरंत ठंडी चीजें न दें।
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