दूध को सेहत का खजाना माना जाता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बाजार से लाया गया पैकेट दूध, जिसे आप रोज़ उबालते हैं, वह वाकई कितना फायदेमंद है?
दरअसल, दूध को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और हानिकारक बैक्टीरिया से मुक्त करने के लिए पास्चराइजेशन नाम की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
पास्चराइजेशन क्या है?
पास्चराइजेशन दूध को एक खास तापमान (लगभग 60°C से 72°C) पर 15–30 सेकंड तक गर्म करने और फिर तुरंत ठंडा करने की प्रक्रिया है।
इसका उद्देश्य है दूध में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीवों को खत्म करना।
क्या पास्चराइजेशन सुरक्षित है?
हां, यह दूध को सुरक्षित बनाता है और उसकी शेल्फ लाइफ बढ़ाता है। लेकिन कई लोग यह नहीं जानते कि इस प्रक्रिया के कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, जो दूध के पोषण को प्रभावित करते हैं।
पास्चराइज्ड दूध के संभावित नुकसान
पोषक तत्वों में कमी
विटामिन C, B12 और फोलिक एसिड जैसी जरूरी चीज़ें गर्मी के कारण कम हो जाती हैं।
एंजाइम नष्ट होना
प्राकृतिक पाचन एंजाइम गर्मी में टूट जाते हैं, जिससे कुछ लोगों को दूध पचाने में दिक्कत होती है।
अच्छे बैक्टीरिया का खत्म होना
प्रोबायोटिक्स यानी आंतों के लिए फायदेमंद बैक्टीरिया भी मर जाते हैं।
एलर्जी की संभावना
गर्मी से दूध में मौजूद कुछ प्रोटीन का रूप बदल जाता है, जिससे एलर्जी हो सकती है।
क्या दूध को उबालना जरूरी है?
हाँ, लेकिन सही तरीके से।
दूध एक नाजुक खाद्य पदार्थ है जो जल्दी खराब हो सकता है। अगर इसे 8°C से कम तापमान में न रखा जाए, तो इसमें हानिकारक बैक्टीरिया पनप सकते हैं।
इसलिए:
दूध को 2 से 3 मिनट तक उबालें
बार-बार उबालना नहीं चाहिए
उबालते समय दूध को हल्का-हल्का हिलाते रहें
दूध उबालने के सही तरीके
दूध को बहुत देर तक न उबालें
उबालने के बाद दूध को खुले में न रखें, तुरंत फ्रिज में रखें
बार-बार गर्म न करें
माइक्रोवेव का इस्तेमाल गर्म करने के लिए न करें
बेहतर विकल्प के रूप में UHT (Ultra High Temperature) दूध या टेट्रा पैक चुन सकते हैं
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