रामनगरी अयोध्या में श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर के गर्भगृह में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में जगमोहन पर स्थापित मूर्ति को इक्यासी कलशों से स्नान कराया गया है।काशी से आये रामलला के प्राण प्रतिष्ठा में अनुष्ठान करा रहे अरुण कुमार दीक्षित नेे बताया कि आज सुबह जगमोहन पर स्थापित मूर्ति को शुद्ध करने के लिये इक्यासी कलशों के विविध औषधि युक्त जल से अचल विग्रह को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्नान कराया गया। उन्होंने बताया कि भगवान रामलला के विग्रह को पहले शर्कराधिवास फिर फलाधिवास में रखा गया। इसके बाद इक्यासी कलशों में एकत्रित विविध औषधियुक्त जल से स्नान कराया गया।
उन्होंने बताया कि श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान आज पांचवें दिन सुबह नौ बजे से शुरू हुआ जो पूजा अनुष्ठान शाम तक चलेगा। प्रतिष्ठा का अनुष्ठान सोलह जनवरी को दोपहर बाद सरयू नदी से प्रारम्भ हुआ था और सत्रह जनवरी को रामलला की मूर्ति का मंदिर परिसर में आगमन हुआ था। मण्डप में आवाहित देवता हैं उनका पूजन तथा हवन किया गया, जो दोपहर एक बजे तक चलता रहा। पुन: दो बजे दोपहर से शाम छह बजे तक पूजन हवन फिर से किया गया। इसके बाद विग्रह को पुष्पाधिवास में रखकर आज की अधिवास प्रक्रिया पूरी की गयी।
काशी से आये श्री दीक्षित ने बताया कि आचार्य लक्ष्मीकांत दीक्षित, अरुण कुमार दीक्षित, सुनील दीक्षित, अशोक वैदिक दीक्षित, राजेन्द्र वैदिक उर्फ पुरुषोत्तम के अलावा देश के विभिन्न प्रांतों से जैसे महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु के एक सौ इक्कीस पंडितों ने रामलला के प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान में जगमोहन पर स्थापित मूर्ति को इक्यासी कलशों से स्नान मंत्रोच्चार के द्वारा कराया। श्रीराम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान पांचवे दिन जारी रहा जहां वास्तु पूजा भी सम्पन्न हुई।
रामलला का पुराना विग्रह अभी पूर्वत: विद्यमान है। उचित समय पर उसे पूरे धार्मिक विधि विधान के साथ मंदिर में विराजमान किया जायेगा।प्राण प्रतिष्ठा के अनुष्ठान में रामलला के विग्रह के अधिवास के साथ आज मुख्यत: वास्तु पूजा सम्पन्न हुई। इस पूजा में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से डा. अनिल मिश्रा सपरिवार और विश्व हिन्दू परिषद के कार्याध्यक्ष आलोक सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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