नेपाल के सुप्रीम कोर्ट हत्या के केस में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी को आममाफी देने पर राष्ट्रपति कार्यालय से जवाब मांगा है। यह आममाफी सरकार की सिफारिश पर दी गई है।
पिछले महीने संविधान दिवस पर नेपाल सरकार ने 670 कैदियों की बाकी सजा माफ करते हुए आममाफी की सिफारिश की थी। 670 कैदियों में हत्या के केस में दोषी ठहराए जा चुके योगराज ढकाल ”रिगल” का भी नाम शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति कार्यालय को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए पांच दिन में जवाब मांगा है। यह नोटिस नेपालगंज की भारती मानंधर की याचिका पर जारी किया गया है। नेपाल की एक अदालत भारती के पति की हत्या के आरोप में योगराज ढकाल ”रिगल” को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुना चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के नाम कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए मामले की सुनवाई फुल बेंच से कराने का फैसला भी किया है। यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मनोज कुमार शर्मा की सिंगल बेंच ने जारी किया है।
उल्लेखनीय है कि सरकार के आममाफी के फैसले की सिफारिश की देशव्यापी आलोचना हो रही है। भारती मानंधर काठमांडू के माईतीघर मण्डला में अनशन पर बैठी हैं। संसद में सरकार समर्थक दलों के कई सदस्य इसकी आलोचना कर चुके हैं। सत्तारूढ़ दल नेपाली कांग्रेस के महासचिव गगन थापा भी सरकार के इस फैसले से खफा हैं। हालांकि रिहा किया गया योगराज ढकाल ”रिगल” नेपाली कांग्रेस का ही नेता बताया गया जा रहा है।
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