केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और जनजातीय कार्य मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा है कि हमें सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर काम नहीं करना है, बल्कि इसे ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता विकास और देश की अर्थव्यवस्था में योगदान केंद्रित भी रखना है। मुंडा ने राष्ट्रीय उच्चतर कृषि प्रसंस्करण संस्थान, रांची में, लाख व तसर उत्पादन प्रणालियों के लिए कृषि उच्चतर प्रसंस्करण पर आयोजित दो दिवसीय विचार-मंथन के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो और हमारे सभी किसान गरीबी रेखा से बाहर कैसे आएं, इसका लक्ष्य लेकर उत्पादन को जोडऩा है।
केंद्रीय मंत्री मुंडा ने कहा कि अगर आप जनजातीय क्षेत्रों के बारे में विचार करते हैं सिर्फ गरीब, कमजोर मानते हुए कार्ययोजना बनाने की बजाय वहां उद्यमिता मॉडल कैसे विकसित कर सकते हैं, इस पर मंथन करने की जरूरत है। उत्पादन इस तरीके का हो कि वह व्यक्ति के विकास के साथ-साथ देश के विकास में भी योगदान दे सके। कार्ययोजना अर्थव्यवस्था में योगदान, जीवन पद्धति में सुधार के साथ-साथ ग्रामीण अस्तित्व को बरकरार रखते हुए तैयार की जाए, क्योंकि शहरीकरण लाभ देने के लिए तो हो सकता है,
लेकिन पेट भरने के लिए नहीं। यह ग्रामीण जीवन ही दे पाएगा। इस दो दिवसीय विचार विमर्श में यह निष्कर्ष निकलना चाहिए कि आज हम कहां पर हैं और भविष्य में कहां होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी 5 ट्रिलियन इकोनॉमी या दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था की बात करते हैं, हमें उस दिशा में भी विचार करना होगा, क्योंकि लोगों के जीवन स्तर में सुधार और अर्थव्यवस्था में उनके योगदान से ही इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा।
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