खाद्य तेलों पर आयात शुल्क घटा, उपभोक्ताओं को राहत

केंद्र सरकार ने घरेलू खाद्य तेलों की कीमतों को नियंत्रित करने, उपभोक्ताओं को राहत देने और अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेलों की कीमतों में तेज वृद्धि से उत्पन्न मुद्रास्फीति के दबाव को कम करने के उद्देश्य से प्रमुख आयातित कच्चे खाद्य तेलों पर मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) घटा दिया है।

इसके तहत कच्चे सूरजमुखी तेल पर बीसीडी 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है, जबकि कच्चे सोयाबीन तेल और कच्चे पाम तेल पर बीसीडी 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार ने संबंधित परिष्कृत खाद्य तेलों पर लागू बीसीडी में भी कमी की है। हालांकि, कच्चे और परिष्कृत खाद्य तेलों के बीच आयात शुल्क का अंतर 19.25 प्रतिशत बरकरार रखा गया है।

आयात शुल्क के युक्तिकरण में अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेलों की कीमतों में वृद्धि और उसके परिणामस्वरूप घरेलू बाजार में लागत तथा खुदरा कीमतों में हुई बढ़ोतरी को ध्यान में रखा गया है। आयात शुल्क आयातित खाद्य तेलों की लागत का महत्वपूर्ण घटक है और इसका घरेलू बाजार की कीमतों पर प्रभाव पड़ता है।

कच्चे खाद्य तेलों पर बीसीडी में कमी से घरेलू बाजार में उनकी लागत कम होने और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है। इस कदम का उद्देश्य उपभोक्ताओं को राहत प्रदान करने के साथ खाद्य कीमतों और समग्र मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करने में योगदान देना है।

सरकार ने घरेलू शोधन क्षमता के उपयोग को बढ़ावा देने और परिष्कृत खाद्य तेलों के अत्यधिक आयात को हतोत्साहित करने के लिए कच्चे और परिष्कृत खाद्य तेलों के बीच शुल्क अंतर बरकरार रखा है। इससे घरेलू शोधकों के लिए अधिक समान अवसर उपलब्ध होने के साथ देश में मूल्यवर्धन की प्रक्रिया जारी रहने की उम्मीद है।

उपभोक्ता लाभ के लिए उद्योग को परामर्श

सरकार ने खाद्य तेल संघों और उद्योग के हितधारकों को सलाह जारी की है, ताकि आयात शुल्क में कमी का पूरा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके।
उद्योग के हितधारकों से अनुरोध किया गया है कि वे लागत में कमी के अनुरूप वितरकों के लिए मूल्य (पीटीडी) और अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) में तत्काल संशोधन करें। खाद्य तेल संघों से भी अपने सदस्यों को संबंधित मूल्य कटौती बिना विलंब लागू करने की सलाह देने का अनुरोध किया गया है।

सरकार अंतरराष्ट्रीय खाद्य तेल बाजारों और घरेलू कीमतों में हो रहे घटनाक्रमों पर नजर रखना जारी रखेगी। साथ ही, उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए किसानों और घरेलू खाद्य तेल उद्योग के लिए संतुलित नीतिगत माहौल बनाए रखते हुए आवश्यकतानुसार उचित उपाय किए जाएंगे।