HDFC Bank ने 7 अप्रैल, 2026 से प्रभावी अपने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ़ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) में किसी भी नई कटौती की घोषणा नहीं की है। बैंक का MCLR में सबसे हालिया संशोधन 7 मार्च, 2026 को हुआ था, जब उसने चुनिंदा अवधियों (tenors) पर दरों में 10 आधार अंकों (basis points) तक की कटौती की थी। इस कदम से, आगामी RBI मौद्रिक नीति घोषणा से पहले, MCLR से जुड़े ऋण लेने वालों (जिनमें होम लोन लेने वाले भी शामिल हैं) को कुछ राहत मिली।
RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक 6 से 8 अप्रैल, 2026 तक होनी निर्धारित है, और नीतिगत निर्णय 8 अप्रैल को आने की उम्मीद है।
वर्तमान HDFC Bank MCLR दरें (7 मार्च, 2026 से प्रभावी):
| अवधि (Tenor) | MCLR दर |
|————-|———–|
| ओवरनाइट | 8.15% |
| 1 महीना | 8.15% |
| 3 महीने | 8.25% |
| 6 महीने | 8.35% |
| 1 वर्ष | 8.35% |
| 2 वर्ष | 8.45% |
| 3 वर्ष | 8.55% |
मध्यम और लंबी अवधि की दरों में 5-5 आधार अंकों की छोटी कटौती देखी गई। ओवरनाइट और एक महीने की अवधि में सबसे अधिक 10 आधार अंकों की कटौती हुई।
MCLR क्या है?
मार्जिनल कॉस्ट ऑफ़ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR), जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक ने 2016 में पेश किया था, वह न्यूनतम ब्याज दर है जो कोई बैंक ऋणों पर वसूल सकता है। इसने पिछली ‘बेस रेट’ प्रणाली की जगह ली है और इसकी गणना बैंक के फंड की सीमांत लागत (marginal cost of funds), परिचालन लागत और अन्य कारकों के आधार पर की जाती है। MCLR से जुड़े ऋण नियमित अंतराल पर (आमतौर पर ‘रीसेट तिथि’ पर) रीसेट किए जाते हैं; जब दरों में संशोधन होता है, तो इस प्रक्रिया के कारण होम लोन या अन्य ऋण लेने वालों की EMI में बदलाव हो सकता है।
ऋण लेने वालों को सलाह दी जाती है कि वे नवीनतम लागू दरों की जानकारी के लिए बैंक की आधिकारिक वेबसाइट देखें या अपनी शाखा से संपर्क करें, क्योंकि MCLR से जुड़े ऋण समय-समय पर रीसेट होते रहते हैं। 8 अप्रैल को RBI की नीति घोषणा से ठीक पहले किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है।
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