नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में शुक्रवार (24 अप्रैल, 2026) को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब राज्यसभा सांसद Raghav Chadha ने आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़कर Bharatiya Janata Party में शामिल होने की घोषणा कर दी। इस फैसले के बाद उन्होंने पार्टी के अन्य सांसदों के साथ मिलकर भाजपा अध्यक्ष Nitin Naveen से मुलाकात की और औपचारिक रूप से सदस्यता ग्रहण की।
राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसदों में से दो-तिहाई से अधिक सदस्य उनके साथ हैं, जो संवैधानिक प्रावधानों के तहत भाजपा में विलय का समर्थन कर रहे हैं। उनके साथ Sandeep Pathak और Ashok Mittal भी मौजूद रहे। इसके अलावा Harbhajan Singh, Rajendra Gupta, Vikramjit Sahney और Swati Maliwal का नाम भी इस सूची में शामिल है।
इस घटनाक्रम के बाद राज्यसभा में AAP की संख्या घटकर सिर्फ तीन रह जाएगी—Sanjay Singh, Narayan Das Gupta और Sant Balbir Singh।
संविधान के अनुसार, यदि किसी पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य पार्टी में विलय के लिए सहमत हो जाते हैं, तो इसे वैध विलय माना जाता है और इसे दलबदल नहीं कहा जाता। ऐसे में संबंधित सांसदों पर दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं होता। यही प्रावधान इस राजनीतिक घटनाक्रम को कानूनी मजबूती देता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम राज्यसभा की राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है और आने वाले समय में संसद के भीतर शक्ति संतुलन में बदलाव देखने को मिल सकता है। वहीं, AAP के लिए यह एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि उसके अधिकांश सांसद अब भाजपा के साथ जा चुके हैं।
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