“जुबीन गर्ग सिर्फ एक गायक नहीं, असम की आत्मा हैं।” — यह शब्द असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहे, जब उनसे पूछा गया कि आखिर क्यों पूरे असम ने जुबीन गर्ग के लिए एकजुट होकर भावुकता दिखाई। मुख्यमंत्री ने जुबीन के संगीत, उनके विद्रोही स्वभाव और सामाजिक चेतना को असम की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया।
जुबीन गर्ग, जिनका नाम असमिया संगीत के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा गया है, न केवल एक बेहतरीन कलाकार हैं, बल्कि एक सामाजिक चिंतक और विचारशील नागरिक भी हैं। उनके गीतों में केवल प्रेम और प्रकृति ही नहीं, बल्कि व्यवस्था के खिलाफ गूंजती आवाज़, युवाओं के मन की बेचैनी और बदलाव की ललक भी साफ झलकती है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बताया कि जब जुबीन अस्पताल में भर्ती थे, तब पूरे राज्य ने उनके लिए प्रार्थनाएं कीं। “लोगों की आंखों में आंसू थे, घर-घर दीप जलाए गए। यह जुबीन गर्ग की लोकप्रियता नहीं, बल्कि उनसे जुड़ा भावनात्मक रिश्ता था,” मुख्यमंत्री ने कहा।
सरमा ने आगे कहा कि जुबीन का विद्रोही स्वभाव असम के जनमानस की भावना को आवाज़ देता है। उनके गीतों ने समय-समय पर सामाजिक असमानता, भ्रष्टाचार और युवा बेचैनी के खिलाफ शांति से क्रांति की भूमिका निभाई है। यही वजह है कि जब उनकी तबीयत बिगड़ी, तो पूरा असम एक भावनात्मक बंधन में बंध गया।
मुख्यमंत्री ने एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें जुबीन के पुराने स्टेज परफॉर्मेंस, गांवों में लोगों से मिलना, और सामाजिक अभियानों में भागीदारी की झलकियां शामिल थीं। यह वीडियो न केवल सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, बल्कि कई लोगों की आंखें नम कर गया।
संगीत आलोचकों का मानना है कि जुबीन गर्ग की कला केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही, बल्कि उसने असम की युवा पीढ़ी को सोचने, सवाल उठाने और बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया। वे असम के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितना कोई जननायक। उन्होंने हमेशा सत्ता से सवाल किए, लेकिन समाज के लिए जिम्मेदार भूमिका भी निभाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जुबीन गर्ग जैसे कलाकारों को न केवल सम्मानित करेगी, बल्कि उनकी विरासत को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए विशेष सांस्कृतिक पहल भी करेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि जुबीन की जिंदगी और संगीत यात्रा पर एक डॉक्यूमेंट्री प्रोजेक्ट जल्द शुरू किया जा सकता है।
असम में जुबीन गर्ग के लिए उमड़ा जनसैलाब यह दर्शाता है कि कलाकार और जनता के बीच संबंध अगर सच्चा हो, तो वह सीमाओं से परे जाकर दिलों को जोड़ देता है। जुबीन गर्ग की आवाज़ असम के दिल की धड़कन बन चुकी है — और जब वह थमी, तो असम की सांसें भी थम-सी गईं।
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