बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुखिया मोहम्मद यूनुस बीते हफ्ते चीन के दौरे पर गए थे। इस यात्रा को बांग्लादेश ने बड़ी कूटनीतिक सफलता के रूप में पेश किया और दावा किया कि यूनुस को चीन में भव्य स्वागत मिला।
यूनुस ने भी चीन के साथ रिश्तों को मजबूत बताते हुए कहा कि हम चीन को अपना अच्छा मित्र मानते हैं, और दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध बेहद मजबूत हैं।
यूनुस ने जिनपिंग को खुश करने की कोशिश की!
यूनुस ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को खुश करने के लिए भारत के खिलाफ तीखे बयान दिए। उन्होंने कहा कि भारत के पूर्वोत्तर राज्य समुद्र से कटे हुए हैं और बांग्लादेश इस क्षेत्र का गार्जियन (संरक्षक) है।
यूनुस के इस दौरे की बांग्लादेश ने खूब तारीफ की, यहां तक कि प्रमुख विपक्षी पार्टी BNP के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने भी इसे बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया।
लेकिन सवाल यह है कि क्या सच में यूनुस को चीन से कुछ खास मिला?
यूनुस के लौटते ही जिनपिंग ने बदला रुख!
यूनुस की यात्रा के ठीक बाद शी जिनपिंग ने भारत के प्रति दोस्ताना रुख दिखाया। उन्होंने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को संदेश भेजकर कहा कि भारत और चीन को “ड्रैगन-एलीफेंट टैंगो” (Dragon-Elephant Tango) की तरह मिलकर आगे बढ़ना चाहिए।
जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन दोनों ही ‘वैश्विक दक्षिण’ के अहम देश हैं और एक-दूसरे की सफलता में योगदान कर सकते हैं।
यानी, यूनुस भारत के खिलाफ चीन को भड़काने गए थे, लेकिन चीन ने भारत से दोस्ती का ही संदेश दे दिया!
चीन असल में क्या चाहता है?
बांग्लादेश यह नहीं समझ रहा कि चीन उसे अपने हितों के लिए इस्तेमाल करना चाहता है।
शेख हसीना के कार्यकाल में बांग्लादेश की विदेश नीति भारत-केंद्रित थी, जिससे चीन को बांग्लादेश में पैर जमाने में मुश्किलें आईं।
शेख हसीना के जाने के बाद चीन ने यूनुस को समर्थन देने के संकेत दिए, ताकि वह बांग्लादेश को अपने प्रभाव में ले सके।
बांग्लादेश को सबक लेना चाहिए!
अगर बांग्लादेश पूरी तरह चीन के भरोसे चला गया, तो उसका हाल भी श्रीलंका और नेपाल जैसा हो सकता है।
श्रीलंका ने चीन से भारी कर्ज लिया और अब आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
नेपाल में भी चीन के दखल के कारण भीतर ही भीतर अस्थिरता बढ़ रही है।
क्या मिला बांग्लादेश को?
यूनुस के चीन दौरे में कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, लेकिन इनमें कुछ भी ठोस नहीं था।
दोनों देशों ने केवल यह दोहराया कि वे आपसी सहयोग जारी रखेंगे।
कोई बड़ा व्यापारिक सौदा या वित्तीय सहायता की घोषणा नहीं हुई।
यानी, बांग्लादेश को कोई ठोस फायदा नहीं हुआ, लेकिन इसे “बड़ी सफलता” के रूप में दिखाया जा रहा है।
निष्कर्ष: क्या यूनुस को धोखा मिला?
यूनुस ने चीन का दामन थामने की कोशिश की, लेकिन चीन ने तुरंत भारत के साथ दोस्ती का संकेत देकर बांग्लादेश को झटका दे दिया।
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