बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और तख्तापलट की चर्चाओं के बीच अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस ने अचानक हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। अमेरिका के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग के प्रमुख स्टीफन श्नेक से मुलाकात के दौरान यूनुस ने कहा कि,
“हमारी जिम्मेदारी है कि 17 करोड़ की आबादी में हर धर्म, हर समुदाय सुरक्षित महसूस करे। अल्पसंख्यकों के साथ कोई अत्याचार नहीं होने दिया जाएगा।”
क्या अब याद आए अल्पसंख्यक?
यूनुस का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब बांग्लादेश की अंतरिम सरकार पर विपक्ष, सेना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का दबाव बढ़ रहा है। वहीं यह सवाल उठ रहा है कि अचानक हिंदुओं की याद क्यों आई?
2024 में हिंदुओं पर 1000 से ज्यादा हमले
जबसे यूनुस को अगस्त 2024 में अंतरिम सरकार की कमान सौंपी गई है, तबसे हिंदू समुदाय पर हमलों की बाढ़ सी आ गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स, खासकर ‘प्रथम आलो’ के मुताबिक, साल 2024 में 1000 से ज्यादा हमले हिंदुओं पर दर्ज किए गए हैं।
इनमें मंदिरों पर हमले, जबरन धर्मांतरण, जमीन कब्जा और शारीरिक हिंसा जैसी घटनाएं शामिल हैं।
सरकार नाकाम, कट्टरपंथियों के दबाव में
यूनुस की सरकार इन हमलों को रोकने में पूरी तरह असफल रही है। आलोचकों का कहना है कि कट्टर इस्लामिक समूहों के दबाव में यूनुस ने निष्क्रियता दिखाई। भारत समेत कई देशों ने इस पर गंभीर चिंता जताई थी।
इमेज मेकओवर की कोशिश?
अब जब देश में सेना और विपक्ष यूनुस के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं और लोकतांत्रिक चुनावों को लेकर असमंजस की स्थिति है, तो यूनुस की यह अल्पसंख्यक हितैषी बयानबाजी कई लोगों को इमेज बिल्डिंग की कोशिश लग रही है।
सूत्रों के मुताबिक, यूनुस चुनाव की पारदर्शिता पर सवाल उठने नहीं देना चाहते और संभवत: इस्तीफे की तैयारी में भी हैं।
अल्पसंख्यकों पर प्रेम: असली चिंता या राजनीतिक मजबूरी?
यूनुस का यह रुख भले ही स्वागत योग्य हो, लेकिन समय और परिस्थितियों को देखते हुए यह सवाल उठता है — क्या यह वास्तव में सुरक्षा की चिंता है या सिर्फ राजनीति?
कई विश्लेषकों का मानना है कि यूनुस इतिहास में अपने नाम पर कोई धब्बा नहीं चाहते, इसलिए जाते-जाते ‘धर्मनिरपेक्ष’ चेहरा पेश करना चाह रहे हैं।
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