मालिक: रमेश, आज काम क्यों इतना सुस्त किया?
रमेश: मालिक, मैं तो आपको खुश रखने की कोशिश कर रहा था, क्योंकि खुश मालिक से ही खुश नौकर बनता है।
मालिक: अच्छा, तो ये सुस्ती क्यों?
रमेश: खुश मालिक के लिए ‘धीरे-धीरे’ काम करना ही सबसे बड़ा इशारा होता है!😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: तुम्हारे फोन की घंटी इतनी तेज क्यों होती है?
रमेश: मालिक, ताकि आपकी आवाज़ सुनते ही मैं तैयार हो जाऊं।
मालिक: लेकिन इतनी तेज?
रमेश: क्योंकि आपकी आवाज़ सुनते ही तो डर भी लगता है!😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: रमेश, तुम इतना काम करते हो कि लगता है तुम घर के मालिक हो!
रमेश: मालिक, असल में मैं घर का मालिक बनने की बजाय, आपका अच्छा नौकर बनने की कोशिश करता हूँ।
मालिक: ये तो अच्छी बात कही!
रमेश: क्योंकि अच्छा नौकर ही कभी अच्छा मालिक बन सकता है।😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: छुट्टी क्यों नहीं लेते हो?
रमेश: मालिक, जब आप ऑफिस में भी छुट्टी नहीं लेते, तो मैं क्यों लूँ?
मालिक: सही कहा!
रमेश: हम दोनों की फीलिंग्स मैच करती हैं, मालिक!😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: रमेश, जब तुम काम नहीं कर रहे होते तो क्या कर रहे होते हो?
रमेश: मालिक, तब मैं आपके लिए प्रार्थना कर रहा होता हूँ कि आपकी डांट कम हो जाए!
मालिक: अरे वाह!
रमेश: देखिए, ये भी तो इंसानी सेवा है।😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: तुम इतनी देर क्यों लगाते हो काम करने में?
रमेश: मालिक, मैं सोचता हूँ कि काम जल्दी कर दूं, तो अगली बार काम और बढ़ा दिया जाएगा।
मालिक: तो?
रमेश: इसलिए धीरे-धीरे चल रहा हूँ, ताकि संतुलन बना रहे।😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: रमेश, तुम्हें कभी बोरियत नहीं होती?
रमेश: मालिक, बोरियत तो तब होती है जब मालिक गुस्सा करते हैं।
मालिक: और खुशी?
रमेश: खुशी तब होती है जब मालिक हँसते हैं… तभी तो हम दोनों का रिश्ता चलता है!😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: तुम इतने सालों से हमारे साथ हो, तुम्हारा सबसे बड़ा डर क्या है?
रमेश: मालिक, सबसे बड़ा डर ये है कि आप मुझसे नाराज़ हो जाओ।
मालिक: और खुशी?
रमेश: खुशी ये है कि मैं आपकी छोटी-छोटी बातों को समझ पाता हूँ।😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: रमेश, तुम इतने सालों में क्या सीखा?
रमेश: मालिक, सबसे बड़ा सबक ये मिला कि हर इंसान की इज्जत करना सबसे जरूरी होता है।
मालिक: खूब कहा!
रमेश: क्योंकि मालिक और नौकर का फर्क सिर्फ नामों का है, दिलों का नहीं।😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: रमेश, क्या कभी तुम्हें लगा कि नौकर-मालिक का रिश्ता दोस्ती में बदल सकता है?
रमेश: मालिक, जब तक आप मुझे इंसान समझते रहोगे, हमारी दोस्ती कायम रहेगी।
मालिक: फिर तो खुश हूँ मैं!
रमेश: और मैं भी, क्योंकि मालिक के दिल में जगह मिलना सबसे बड़ी दौलत है।😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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