आज के समय में जब प्रदूषण हमारे स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहा है, ऐसे में स्मार्टफोन हमें यह बताने में सक्षम हो गए हैं कि हमारे आस-पास की हवा कितनी स्वच्छ या दूषित है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके iPhone या Android फोन को यह जानकारी कहां से मिलती है?
दरअसल, आपके स्मार्टफोन में मौजूद मौसम या “एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI)” ऐप्स वास्तविक समय में डेटा जुटाने के लिए कई भरोसेमंद स्रोतों से जानकारी लेते हैं। Apple और Google दोनों ही अपने-अपने प्लेटफॉर्म्स पर विभिन्न पर्यावरण एजेंसियों, सरकारी विभागों और सैटेलाइट डेटा सेवाओं से जुड़कर यह जानकारी उपलब्ध कराते हैं।
Apple का Weather ऐप मुख्य रूप से BreezoMeter, Weather Channel, और स्थानीय पर्यावरण एजेंसियों के डेटा पर आधारित होता है। BreezoMeter जैसी सेवाएं सैटेलाइट इमेजरी, ट्रैफिक डेटा, औद्योगिक उत्सर्जन और मौसम के पैटर्न को मिलाकर हवा की गुणवत्ता का सूक्ष्म विश्लेषण करती हैं। इन सब आंकड़ों को मिलाकर उपयोगकर्ताओं के लिए “रियल-टाइम AQI स्कोर” तैयार किया जाता है, जो बताता है कि किसी क्षेत्र की हवा सांस लेने के लिए कितनी सुरक्षित है।
वहीं, Android डिवाइसों में Google का “Weather” और “Maps” सिस्टम AirNow, OpenAQ, और कई स्थानीय स्रोतों से जुड़कर प्रदूषण के स्तर की निगरानी करता है। Google Maps में अब तो “Air Quality Layer” भी उपलब्ध है, जिससे उपयोगकर्ता किसी भी स्थान की वायु स्थिति को रंगों के संकेत से समझ सकते हैं — हरा मतलब साफ हवा, पीला मध्यम और लाल अत्यधिक प्रदूषित।
इसके अलावा, कुछ आधुनिक स्मार्टफोन और वियरेबल डिवाइसों में बिल्ट-इन सेंसर भी शामिल किए जा रहे हैं, जो सीमित स्तर पर आस-पास के प्रदूषक तत्वों को पहचान सकते हैं। हालांकि, फिलहाल अधिकांश डेटा बाहरी नेटवर्क और सैटेलाइट्स पर निर्भर रहता है।
इन डिजिटल प्रयासों ने आम लोगों के लिए पर्यावरणीय जागरूकता को नया आयाम दिया है। अब कोई भी व्यक्ति केवल अपने फोन की स्क्रीन पर देखकर यह तय कर सकता है कि सुबह की सैर के लिए बाहर जाना सुरक्षित है या नहीं।
यह भी पढ़ें:
शोले के 50 साल: वीरू ने लूटे दर्शकों के दिल और कमाई के मामले में भी बाज़ी मारी
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check