फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार विज्ञापन देखने से परेशान यूजर्स के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। अब मेटा (Meta) कंपनी ने उपयोगकर्ताओं को विज्ञापन-मुक्त अनुभव देने की सुविधा शुरू की है। हालांकि यह पूरी तरह मुफ्त नहीं है — इसके लिए यूजर्स को एक नाममात्र की मासिक फीस चुकानी होगी।
यह फैसला डिजिटल प्राइवेसी कानूनों, खासकर यूरोपीय यूनियन के डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन्स (GDPR) को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। मेटा अब उन यूजर्स को विकल्प दे रहा है, जो नहीं चाहते कि उनकी ऑनलाइन गतिविधियों के आधार पर उन्हें व्यक्तिगत विज्ञापन दिखाए जाएं।
क्या है नया विकल्प?
Meta ने एक नई सब्सक्रिप्शन सेवा लॉन्च की है, जिसके ज़रिए Facebook और Instagram पर विज्ञापन हटाए जा सकते हैं। यह सुविधा फिलहाल EU (यूरोपीय यूनियन) के देशों में शुरू की गई है, लेकिन कंपनी इसे धीरे-धीरे अन्य देशों में भी लागू करने की योजना बना रही है।
सब्सक्रिप्शन शुल्क की बात करें तो:
वेब यूजर्स के लिए: लगभग €9.99 प्रति माह
मोबाइल ऐप यूजर्स के लिए: €12.99 प्रति माह (App store शुल्क सहित)
कैसे काम करेगा यह मॉडल?
यह सब्सक्रिप्शन मॉडल उपयोगकर्ता को यह चुनने की सुविधा देता है कि वे मुफ्त सेवा के साथ विज्ञापन देखें या भुगतान करके एक एड-फ्री अनुभव लें। अगर यूजर भुगतान नहीं करता है, तो उसे पहले की तरह ही व्यक्तिगत विज्ञापन दिखाए जाएंगे।
Meta का कहना है कि यह नया विकल्प उपयोगकर्ताओं को अधिक पारदर्शिता और नियंत्रण देता है कि उनका डेटा कैसे इस्तेमाल हो रहा है।
भारत में कब आएगी यह सुविधा?
भारत में अभी इस तरह की विज्ञापन हटाने वाली सब्सक्रिप्शन सेवा उपलब्ध नहीं है, लेकिन डिजिटल अधिकारों की बढ़ती मांग और यूजर प्राइवेसी को लेकर चल रही बहस को देखते हुए, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि मेटा भविष्य में इसे भारत समेत अन्य देशों में भी लागू कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारतीय यूजर्स को यह विकल्प मिलता है, तो बड़ी संख्या में लोग इसे अपनाने के लिए तैयार हो सकते हैं — खासकर वे यूजर्स जो प्राइवेसी को प्राथमिकता देते हैं।
क्या कहता है डिजिटल समुदाय?
डिजिटल नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए “पेड सर्विस मॉडल” की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इससे कंपनियां विज्ञापन पर निर्भरता कम कर सकती हैं और उपयोगकर्ताओं को बेहतर अनुभव दे सकती हैं।
हालांकि कुछ लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब प्राइवेसी केवल अमीरों के लिए आरक्षित रह जाएगी?
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