महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल (MMC) ने एक बड़ा और विवादास्पद फैसला लेते हुए होम्योपैथिक डॉक्टरों को एलोपैथिक दवाएं लिखने की इजाजत दे दी है — बशर्ते वे “सर्टिफिकेट कोर्स इन मॉडर्न फार्माकोलॉजी (CCMP)” नामक छह महीने का कोर्स पूरा कर लें। यह फैसला 15 जुलाई से लागू किया जाएगा।
हालांकि इस फैसले ने देशभर के मेडिकल हलकों में बहस छेड़ दी है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) समेत कई संगठनों ने इस कदम का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि यह मेडिकल प्रैक्टिस के मानकों और मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।
क्या है CCMP कोर्स और यह विवाद क्यों हुआ?
यह पूरा मामला एक 2014 के कानून संशोधन से जुड़ा है, जिसमें होम्योपैथिक डॉक्टर्स को कुछ शर्तों के साथ एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति दी गई थी। हालांकि, यह संशोधन कानूनी अड़चनों और हाईकोर्ट की रोक की वजह से अब तक लागू नहीं हो सका था।
अब MMC — जो 2022 से बिना किसी चुनी हुई मेडिकल बॉडी के प्रशासनिक रूप से काम कर रही है — ने अचानक इस नियम को लागू करने का निर्णय लिया है। MMC के प्रशासक डॉ. विंकी रुघवानी के अनुसार, सरकार और कानून विभाग की मंजूरी मिलने के बाद यह फैसला लिया गया।
15 जुलाई से मिलेगा रजिस्ट्रेशन, लेकिन किन दवाओं की मिलेगी अनुमति?
अब 15 जुलाई से CCMP कोर्स पूरा करने वाले होम्योपैथिक डॉक्टर्स को एलोपैथिक प्रिस्क्रिप्शन लिखने के लिए रजिस्ट्रेशन दिया जाएगा। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि वे कौन-कौन सी दवाएं लिख सकेंगे — सभी या केवल सीमित।
IMA का विरोध: “यह मेडिकल सिस्टम से खिलवाड़ है”
IMA महाराष्ट्र के अध्यक्ष डॉ. संतोष कदम ने इस फैसले की तीखी आलोचना की है। उनके अनुसार, हाईकोर्ट पहले ही इस संशोधन पर स्टे लगा चुका है, और अब सरकार न्यायिक प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए इसे लागू करने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि FDA (फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) ने दिसंबर 2024 में निर्देश दिए थे कि दवा विक्रेता होम्योपैथ्स को दवा दे सकते हैं, बशर्ते उन्होंने CCMP कोर्स किया हो। लेकिन FDA का काम केवल दवा वितरण को रेगुलेट करना है, न कि यह तय करना कि कौन डॉक्टर है और कौन नहीं — यह अधिकार केवल MMC के पास है।
क्या इस फैसले के पीछे राजनीतिक दबाव है?
डॉ. कदम ने आरोप लगाया कि इस फैसले के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में कई होम्योपैथिक कॉलेज ऐसे राजनेताओं या उनके करीबियों के हैं, जिन्हें इस नियम से सीधा फायदा मिलेगा।
फरवरी 2025 में हुई एक अहम बैठक में — जिसमें राज्य के मेडिकल एजुकेशन मंत्री हसन मुश्रिफ, BJP विधायक रंधीर सावरकर, MMC और होम्योपैथिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे — यह तय हुआ था कि 2014 का संशोधन लागू किया जाएगा।
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