मासिक धर्म के दौरान वजन बढ़ने की शिकायत महिलाओं में आम है। कई महिलाएँ इसे स्थायी मोटापे का संकेत मानकर परेशान हो जाती हैं, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह ज्यादातर अस्थायी बदलाव होता है। अपोलो अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार, पीरियड्स से पहले और दौरान शरीर में कुछ प्राकृतिक हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जिनकी वजह से वजन में 1 से 3 किलो तक का उतार-चढ़ाव सामान्य माना जाता है।
डॉक्टर बताते हैं कि महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन मासिक चक्र के समय काफी सक्रिय रहते हैं। जैसे-जैसे पीरियड्स नज़दीक आते हैं, इन हार्मोनों में उतार-चढ़ाव शुरू हो जाता है, जिससे शरीर पानी को अधिक मात्रा में रोकने लगता है। इसी वजह से वजन अचानक बढ़ा हुआ महसूस होता है। यह वही स्थिति है जिसमें हाथ-पैर भारी लगना, पेट फूला हुआ महसूस होना और चेहरे पर सूजन जैसी परेशानी भी दिखाई देती हैं।
पानी रुकने से बढ़ता है वजन
विशेषज्ञ इसे वॉटर रिटेंशन यानी पानी रुकने की स्थिति बताते हैं। यह वसा बढ़ने के कारण नहीं, बल्कि शरीर में तरल पदार्थ जमा होने के कारण होता है। आमतौर पर पीरियड्स शुरू होने के 2–3 दिन बाद यह स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगती है। इसलिए डॉक्टर इसे किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत मानने के बजाय एक सामान्य चक्र का हिस्सा बताते हैं।
भूख बढ़ना भी सामान्य
पीरियड्स के दौरान कई महिलाओं में भूख बढ़ जाती है और मीठा खाने की इच्छा तेज हो जाती है। हार्मोनल बदलाव दिमाग के उन हिस्सों को प्रभावित करते हैं जो भूख और मनोदशा के लिए जिम्मेदार होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय अगर महिलाएं अनियंत्रित रूप से कैलोरी का सेवन करती हैं, तो अस्थायी वजन बढ़ सकता है। हालांकि यह भी कुछ दिनों में संतुलित आहार लेने से सामान्य हो जाता है।
तनाव की भूमिका
डॉक्टरों का कहना है कि तनाव भी एक महत्वपूर्ण कारण है। तनाव के दौरान शरीर कोर्टिसोल हार्मोन छोड़ता है, जो भूख बढ़ाने और शरीर में पानी रोकने का काम करता है। इसलिए पीरियड्स के समय मानसिक तनाव वजन में उतार-चढ़ाव को और बढ़ा सकता है।
कैसे बचें इस अस्थायी वजन बढ़ने से?
1. नमक का सेवन कम करें
नमक पानी रोकने की प्रवृत्ति को बढ़ाता है। पीरियड्स के आसपास नमक कम करने से सूजन और वजन दोनों में राहत मिल सकती है।
2. पर्याप्त पानी पिएं
अधिक पानी पीने से शरीर में जमा अतिरिक्त सोडियम बाहर निकलता है। इससे ब्लोटिंग कम होती है और पानी रुकने की समस्या भी घटती है।
3. हल्का व्यायाम करें
डॉक्टर योग, तेज़ चाल से चलना या स्ट्रेचिंग जैसे हल्के व्यायाम की सलाह देते हैं। इससे ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और हार्मोन संतुलित रहते हैं।
4. कैलोरी पर नियंत्रण रखें
मीठा खाने की इच्छा बढ़ना सामान्य है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि कैलोरी की अनियंत्रित मात्रा लें। फलों, नट्स और डार्क चॉकलेट जैसे विकल्प बेहतर हैं।
5. नींद पूरी लें
कम नींद हार्मोनल असंतुलन को बढ़ा सकती है। रोजाना 7–8 घंटे की नींद वजन स्थिर रखने में मदद करती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि हर महीने वजन में अत्यधिक उतार-चढ़ाव हो, पीरियड्स बहुत अनियमित हों या सूजन सामान्य नहीं हो रही हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में वजन बढ़ना अस्थायी होता है, लेकिन सतर्क रहना हमेशा फायदेमंद है।
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