मई में ही तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है और यह भीषण गर्मी लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। सुबह 10 बजे के बाद बाहर निकलना जोखिम भरा हो जाता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें दिल से जुड़ी समस्याएं हैं। गर्मियों में कई बार जो लक्षण दिखाई देते हैं, लोग उन्हें सामान्य लू समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि ये हार्ट अटैक के संकेत भी हो सकते हैं।
डॉक्टर्स के मुताबिक, सर्दियों में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है, लेकिन गर्मियों में भी दिल से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। इस मौसम में डिहाइड्रेशन, हीट स्ट्रेस, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, अत्यधिक फिजिकल एक्टिविटी और ब्लड प्रेशर में उतार-चढ़ाव हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
गर्मियों में हार्ट अटैक का खतरा क्यों बढ़ता है?
👉 हीट स्ट्रेस:
गर्मी में जब शरीर का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और शरीर उसे कंट्रोल नहीं कर पाता, तो हीट स्ट्रेस बढ़ जाता है, जिससे दिल पर दबाव बढ़ता है।
👉 डिहाइड्रेशन:
गर्मी में ज्यादा पसीना निकलने और पानी की कमी से शरीर डिहाइड्रेट हो जाता है। इससे हार्टबीट तेज हो जाती है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
👉 फिजिकल एक्टिविटी:
गर्मियों में ज्यादा मेहनत या हाई इंटेंसिटी वर्कआउट नुकसानदेह हो सकता है। कोशिश करें कि सुबह जल्दी या देर शाम को ही व्यायाम करें।
👉 ब्लड प्रेशर कंट्रोल:
गर्मी में बीपी में बदलाव होना सामान्य है। इसलिए नियमित रूप से बीपी चेक करते रहें और अगर कोई गड़बड़ी महसूस हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। पानी भरपूर मात्रा में पिएं और शरीर को ठंडा रखें।
ध्यान रखें:
गर्मी में दिल की बीमारी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय रहते सावधानी बरतें और दिल को हेल्दी रखें।
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