मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं नमी और बदलते मौसम के कारण साइनस जैसी दिक्कतें भी बढ़ जाती हैं। बहुत से लोग बारिश के दिनों में सिरदर्द, बंद नाक, भारीपन और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याओं से जूझते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मानसून में नमी और एलर्जी की संभावना बढ़ने से साइनस इंफेक्शन के मामले भी बढ़ जाते हैं।
मानसून में क्यों बिगड़ता है साइनस?
डॉक्टर्स के अनुसार, मानसून में वातावरण में नमी का स्तर अधिक होता है। इससे नाक की कोशिकाएं सूज जाती हैं और म्यूकस ड्रेनेज रुक जाता है। ऐसे में साइनस कैविटी में म्यूकस जमने लगता है, जिससे संक्रमण और सूजन हो जाती है।
साथ ही बारिश में बढ़ने वाले फंगल स्पोर्स, डस्ट माइट्स और पोल्लन एलर्जन भी साइनस ट्रिगर कर सकते हैं।
साइनस के आम लक्षण
लगातार सिरदर्द या माथे में दबाव
नाक बंद या बहती हुई नाक
चेहरे पर भारीपन या दर्द
सूंघने की क्षमता कम होना
गले में खराश या खांसी, खासकर रात में
थकान और आंखों के नीचे सूजन
कैसे करें साइनस को कंट्रोल?
नमी से बचाव:
घर को सूखा और वेंटिलेटेड रखें। एयर प्यूरिफायर या डीह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल करें।
नाक को साफ रखें:
दिन में दो बार स्टीम लें या सलाइन वॉश से नाक को साफ करें।
एलर्जन से बचें:
फफूंद लगी दीवारें, धूल, धुआं और परफ्यूम से दूरी बनाएं।
हाइड्रेट रहें:
ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं ताकि म्यूकस पतला बना रहे।
इम्यूनिटी बढ़ाएं:
विटामिन-C युक्त चीजें जैसे आंवला, नींबू, संतरा आदि खाएं।
जरूरत हो तो डॉक्टर से सलाह लें:
बार-बार साइनस होने पर ENT स्पेशलिस्ट से परामर्श लें। जरूरत पड़ने पर एंटीहिस्टामिन या एंटीबायोटिक दिए जा सकते हैं।
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