गर्भावस्था के दौरान पीठ दर्द एक आम समस्या है, खासकर दूसरे और तीसरे ट्राइमेस्टर में। हार्मोनल बदलाव, शरीर के बढ़ते वजन और मांसपेशियों पर बढ़ते दबाव के कारण महिलाओं को अक्सर लोअर बैक पेन या कमर के ऊपरी हिस्से में दर्द की शिकायत होती है।
पीठ दर्द के मुख्य कारण
वजन में बढ़ोतरी: गर्भावस्था के दौरान औसतन 10–15 किलोग्राम वजन बढ़ता है, जिससे रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है।
हार्मोनल बदलाव: प्रेग्नेंसी के दौरान “रिलैक्सिन” नामक हार्मोन शरीर के जोड़ों को ढीला करता है ताकि डिलीवरी आसान हो सके। इसका असर रीढ़ की हड्डी और पेल्विस पर भी पड़ता है।
शरीर की मुद्रा में बदलाव: जैसे-जैसे पेट बढ़ता है, महिलाएं पीछे झुककर चलने लगती हैं, जिससे पीठ की मांसपेशियों पर तनाव बढ़ता है।
भावनात्मक तनाव: मानसिक तनाव भी मांसपेशियों को टाइट कर देता है, जिससे पीठ दर्द और बढ़ जाता है।
जुड़वा गर्भ या अधिक एमनियोटिक फ्लूइड: इससे गर्भाशय का वजन और दबाव और बढ़ जाता है।
बचाव और राहत के आसान उपाय
सही पोस्चर: खड़े होते समय सीधे खड़े रहें, एक पैर थोड़ा आगे रखें और लंबे समय तक एक ही स्थिति में खड़े या बैठे न रहें।
सपोर्टिव कुर्सी और तकिया: बैठते समय कमर के पीछे सपोर्ट के लिए तकिया लगाएं।
हल्की एक्सरसाइज: प्रीनेटल योगा, वॉकिंग और स्ट्रेचिंग दर्द कम करने में मदद करते हैं। लेकिन डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
गर्म पानी से सिकाई: हल्के गर्म पानी की बोतल से कमर पर सिकाई करें।
मालिश और फिजियोथेरेपी: प्रशिक्षित व्यक्ति से की गई हल्की मालिश आराम देती है।
सपोर्ट बेल्ट: मैटरनिटी बेल्ट पहनने से पीठ पर से दबाव कम होता है।
नींद की सही मुद्रा: बाईं करवट लेटें और घुटनों के बीच तकिया रखें।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर दर्द असहनीय हो
लगातार तेज दर्द हो
ब्लीडिंग या क्रैम्पिंग के साथ हो
एक पैर में झनझनाहट या कमजोरी हो
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