मालिक: रमेश, तुम इतना थके हुए क्यों लग रहे हो?
रमेश: मालिक, आज थकावट शरीर में नहीं, आत्मा में है।
मालिक: आत्मा में थकावट? वो कैसे?
रमेश: जब पूरे घर का काम करके भी बीवी बोले, “बस झाड़ू ही तो लगाया है”, तो आत्मा खुद को ठगा हुआ महसूस करती है!😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: रमेश, जल्दी उठो! 5 बजे हैं!
रमेश: मालिक, अलार्म तो 6 का था।
मालिक: मैंने बजा दिया…
रमेश: मालिक, अलार्म तो मशीन का होता है, आप इंसान हैं… थोड़ी इंसानियत भी दिखाइए।😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: रमेश, तुम खाना भी बना लेते हो, साफ-सफाई भी करते हो, बच्चों को भी संभालते हो।
रमेश: जी मालिक।
मालिक: फिर तुम शादी क्यों नहीं कर लेते?
रमेश: मालिक, आपकी बीवी देखकर तो मन ही बदल गया!😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: रमेश, तुम रोज 10 मिनट देर क्यों आते हो?
रमेश: मालिक, वो रास्ते में एक बोर्ड लगा है – “धीरे चलिए, जीवन अनमोल है।”
मालिक: अच्छा! और बाकी टाइम?
रमेश: बाकी टाइम मैं सोचता हूँ, मैं अनमोल हूँ या मेरी नौकरी?😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: रमेश, फिर से छुट्टी? अब क्या बहाना है?
रमेश: मालिक, आज मेरा “मानसिक अवकाश” है।
मालिक: ये क्या होता है?
रमेश: जब शरीर काम कर रहा हो, लेकिन दिमाग कहे – ‘आज नहीं भाई!’😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: रमेश, तुम्हारा चेहरा आज बहुत उदास क्यों है?
रमेश: मालिक, आज घर की रोटी जली नहीं… तो बीवी ने मुझसे प्यार से बात नहीं की।
मालिक: और यहां काम क्यों नहीं कर रहे?
रमेश: जब दिल ही टूट गया, तो झाड़ू किस काम की?😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: रमेश, तुम मोबाइल पर क्या कर रहे हो हर वक्त?
रमेश: मालिक, अब तो AI आ गया है… मैं सोच रहा हूँ, कहीं ये झाड़ू-पोंछा भी ना टेकओवर कर ले!
मालिक: तो डर रहे हो?
रमेश: जी नहीं, उम्मीद है… शायद मालिकों को भी तब काम करना पड़े!😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: रमेश, आज तुम बहुत साफ कपड़े पहनकर आए हो, कोई खास बात?
रमेश: जी मालिक, आज आपकी बेटी के स्कूल में PTM है… और मुझे “गाड़ी वाला अंकल” कहकर बुलाया गया है।
मालिक: अच्छा… इज़्ज़त बढ़ गई!
रमेश: जी, नौकर हूं पर अब “अंकल” कहलाता हूं। प्रगति हो रही है!😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: रमेश, तुम हर बार काम के बीच में फोन क्यों उठाते हो?
रमेश: मालिक, बीवी की कॉल है…
मालिक: क्या इतना ज़रूरी है?
रमेश: मालिक, अगर नहीं उठाऊं तो मैं नौकर नहीं रहूंगा… बस ‘Ex-Husband’ बन जाऊंगा!😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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मालिक: रमेश, तुम इतने साल से हमारे साथ हो, तुम्हें क्या चाहिए इस बार दिवाली बोनस में?
रमेश: मालिक, एक दिन की छुट्टी और आपसे गले मिलना।
मालिक (हैरान): गले? क्यों?
रमेश: क्योंकि आज 10 साल हो गए, पर कभी लगा ही नहीं कि नौकर हूं। आपने हमेशा इंसान समझा… वो एहसास ही सबसे बड़ा बोनस है।😆🤣🤣🤣🤣😝😝😝
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