महिलाओं में मासिक धर्म का दर्द क्यों ज्यादा होता है, जानें विशेषज्ञ की राय

हर महीने महिलाओं में मासिक धर्म या पीरियड्स के दौरान दर्द होना आम है, लेकिन कुछ महिलाओं को यह दर्द सामान्य से बहुत अधिक होता है। इसे डिसमेंरेया कहा जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पीरियड्स के दर्द की तीव्रता अलग-अलग महिलाओं में कई कारणों से बदलती रहती है।

डॉक्टरों का कहना:
पीरियड्स के दौरान दर्द का मुख्य कारण गर्भाशय की मांसपेशियों का सिकुड़ना है। मासिक धर्म में प्रोस्टाग्लैंडिन नामक हार्मोन रिलीज होता है, जो गर्भाशय को सिकोड़ता है ताकि गर्भाशय की परत बाहर निकले। जिन महिलाओं में प्रोस्टाग्लैंडिन की मात्रा अधिक होती है, उन्हें दर्द ज्यादा होता है।

अन्य कारण:

एंडोमेट्रियोसिस – यह स्थिति तब होती है जब गर्भाशय की परत के समान ऊतक अन्य अंगों में बढ़ जाता है। इससे पीरियड्स के दौरान अत्यधिक दर्द, पेट फूलना और भारी रक्तस्राव हो सकता है।

फाइब्रॉएड्स – गर्भाशय में होने वाले छोटे-छोटे ट्यूमर भी दर्द और असुविधा बढ़ा सकते हैं।

अंडाशय में समस्या – जैसे सिस्ट या हार्मोन असंतुलन।

तनाव और जीवनशैली – मानसिक तनाव, अनियमित नींद और खराब आहार भी पीरियड्स के दर्द को बढ़ा सकते हैं।

एक्सपर्ट्स की सलाह:

गर्म पानी की थैली – पेट पर रखने से मांसपेशियों की सिकुड़न कम होती है और दर्द में राहत मिलती है।

हल्का व्यायाम और स्ट्रेचिंग – योग और हल्की एक्सरसाइज ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाकर दर्द को कम करते हैं।

संतुलित आहार – आयरन, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त आहार से पीरियड्स में आराम मिलता है।

दर्द निवारक दवाइयां – यदि दर्द असहनीय हो तो डॉक्टर की सलाह से पेनकिलर या प्रोटाग्लैंडिन कम करने वाली दवाएं ली जा सकती हैं।

विशेष चेतावनी:
अगर मासिक धर्म के दौरान अत्यधिक दर्द, असामान्य रक्तस्राव, लगातार थकान या बेहोशी जैसी समस्याएं हों, तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। यह किसी गंभीर स्थिति, जैसे एंडोमेट्रियोसिस या फाइब्रॉएड्स, का संकेत हो सकता है।

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