मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक स्वाभाविक चरण है, लेकिन इसके बाद शरीर में कई ऐसे बदलाव होते हैं जो सेहत को सीधे प्रभावित करते हैं। इन्हीं में से एक बड़ी समस्या है हड्डियों का कमजोर होना। अक्सर महिलाएं इसे उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देती हैं, जबकि इसके पीछे एक जरूरी न्यूट्रिएंट की कमी मुख्य वजह होती है।
मेनोपॉज के बाद हड्डियां क्यों कमजोर होती हैं?
मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन तेजी से कम हो जाता है। एस्ट्रोजन हड्डियों को मजबूत रखने में अहम भूमिका निभाता है। इसकी कमी से
- हड्डियों का घनत्व (Bone Density) घटने लगता है
- कैल्शियम का अवशोषण कम हो जाता है
- हड्डियां धीरे-धीरे खोखली और कमजोर होने लगती हैं
इसी कारण मेनोपॉज के बाद ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है।
इस एक न्यूट्रिएंट की कमी है सबसे बड़ी वजह
कैल्शियम (Calcium)
कैल्शियम हड्डियों का मुख्य निर्माण तत्व है। मेनोपॉज के बाद अगर शरीर को पर्याप्त कैल्शियम नहीं मिलता, तो हड्डियां तेजी से कमजोर होने लगती हैं और जरा-सी चोट में भी फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मेनोपॉज के बाद महिलाओं को पहले से ज्यादा कैल्शियम की जरूरत होती है।
कैल्शियम की कमी के लक्षण
- जोड़ों और कमर में दर्द
- बार-बार थकान महसूस होना
- हड्डियों में कमजोरी
- दांतों का कमजोर होना
- छोटी चोट में भी फ्रैक्चर
कैल्शियम को डाइट में कैसे शामिल करें?
कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ
- दूध, दही, पनीर
- तिल और रागी
- हरी पत्तेदार सब्ज़ियां
- बादाम और अखरोट
- सोया और टोफू
नोट: कैल्शियम के बेहतर अवशोषण के लिए विटामिन D भी जरूरी है।
विटामिन D क्यों है जरूरी?
विटामिन D के बिना शरीर कैल्शियम को सही तरह से अवशोषित नहीं कर पाता।
- रोज़ 15–20 मिनट धूप में बैठें
- डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए जरूरी टिप्स
- रोज़ाना हल्की एक्सरसाइज और वॉक करें
- वजन उठाने वाली एक्सरसाइज अपनाएं
- धूम्रपान और शराब से दूरी रखें
- समय-समय पर बोन डेंसिटी टेस्ट कराएं
मेनोपॉज के बाद हड्डियों का कमजोर होना सामान्य नहीं बल्कि चेतावनी है। अगर समय रहते कैल्शियम और विटामिन D की कमी को पूरा किया जाए और सही लाइफस्टाइल अपनाई जाए, तो हड्डियों को लंबे समय तक मजबूत रखा जा सकता है।
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