बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र ने अपने फिल्मी करियर के बाद राजनीति में कदम रखा और एक नई पहचान बनाई। उन्होंने 2004 के लोकसभा चुनाव में हरियाणा की रोहतक सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। धर्मेंद्र ने यह चुनाव अपने करीबी प्रतिद्वंदी को लगभग 1,01,000 वोटों के अंतर से हराया था। यह जीत उन्हें सांसद के रूप में नई जिम्मेदारी देने वाली थी।
धर्मेंद्र की राजनीति में एंट्री को लेकर शुरुआती उत्साह काफी बड़ा था। उनके पास न केवल लोकप्रियता थी, बल्कि जनता के बीच उनके सहज और सीधे व्यवहार ने भी उन्हें समर्थन दिलाया। फिल्मी दुनिया में जो करिश्मा उन्होंने बनाया, वह राजनीति के रंगमंच पर भी कुछ हद तक दिखा।
सांसद बनने के बाद धर्मेंद्र ने हालांकि राजनीतिक दुनिया में लंबे समय तक सक्रिय नहीं रहकर सभी को चौंकाया। उन्होंने कुछ ही वर्षों के भीतर राजनीति से दूरी बना ली। इसके पीछे उनका मानना था कि राजनीति की तेज़ रफ्तार और जटिल प्रक्रियाएं उनके लिए उपयुक्त नहीं हैं। उन्होंने हमेशा यह स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता हमेशा फिल्मों और समाज सेवा रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि धर्मेंद्र जैसी लोकप्रिय हस्ती का राजनीति में आना जनता के लिए आकर्षक जरूर था, लेकिन लंबे समय तक राजनीति में बने रहना हर किसी के बस की बात नहीं है। धर्मेंद्र की तरह कई फिल्मी सितारे राजनीति में आते हैं, लेकिन उनकी प्राथमिकताओं और व्यस्त शेड्यूल के कारण वे अक्सर लंबे समय तक सक्रिय नहीं रह पाते।
धर्मेंद्र की राजनीति की अवधि के दौरान उन्होंने कुछ सामाजिक मुद्दों पर आवाज उठाई और क्षेत्रीय विकास के लिए कई सुझाव दिए। लेकिन राजनीतिक दलों और कड़ा चुनावी माहौल उनके लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। उनका फैसला कि वे राजनीति को आगे नहीं बढ़ाएंगे, कई समर्थकों के लिए आश्चर्यजनक था, लेकिन उन्होंने इसे व्यक्तिगत और व्यावसायिक प्राथमिकताओं के अनुरूप बताया।
फिल्म जगत में अपनी चमक बनाए रखने के साथ-साथ धर्मेंद्र ने यह भी दिखा दिया कि राजनीतिक सफर हर किसी के लिए स्थायी नहीं होता। उनके राजनीतिक अनुभव ने यह स्पष्ट किया कि लोकप्रियता वोट में मदद कर सकती है, लेकिन राजनीति में लंबे समय तक बने रहने के लिए गहरी रणनीति और समर्पण की आवश्यकता होती है।
आज धर्मेंद्र फिल्मी और सामाजिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय हैं। उन्होंने राजनीति में बिताए समय को सीखने और अनुभव प्राप्त करने के रूप में देखा। उनकी राजनीति से दूरी ने यह भी साबित किया कि कभी-कभी व्यक्ति अपने मूल कार्यक्षेत्र में अधिक प्रभावी और संतुष्ट रह सकता है।
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