केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नागपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जातिवाद और शिक्षा पर बड़ी बात कही. उन्होंने कहा कि “कोई भी इंसान अपनी जाति, भाषा या पंथ से बड़ा नहीं होता, बल्कि वह अपने गुणों से बड़ा होता है.”
उन्होंने मिसाइलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि –
“जब कलाम साहब न्यूक्लियर साइंटिस्ट बने, तो उन्होंने ऐसा काम किया कि आज उनका नाम सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में गूंजता है. हमें भी जाति, धर्म और पंथ के आधार पर भेदभाव नहीं करना चाहिए.”
“जो करेगा जाति की बात, उसको कसकर मारूंगा लात!”
👉 गडकरी ने साफ कहा कि –
“राजनीति में कई जातिवादी लोग मेरे पास आए. मैंने 50 हजार लोगों के सामने कह दिया – ‘जो करेगा जाति की बात, उसको कसकर मारूंगा लात!’
उन्होंने आगे कहा –
👉 “अगर चुनाव हार भी गया तो क्या? इंसान चुनाव हारेगा तो मरेगा थोड़ी! मंत्री नहीं बना तो क्या, लेकिन अपने उसूलों से समझौता नहीं करूंगा.”
मुस्लिम समुदाय को लेकर क्या बोले गडकरी?
👉 गडकरी ने मुस्लिम समाज में शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि –
“हम मस्जिद में एक बार नहीं, 100 बार नमाज पढ़ सकते हैं, लेकिन अगर साइंस और टेक्नोलॉजी को आत्मसात नहीं करेंगे तो भविष्य कैसे संवारेंगे?”
👉 उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज पांच मुख्य धंधों में सबसे ज्यादा दिखता है –
चाय की टपरी
पान का ठेला
कबाड़ी की दुकान
ट्रक ड्राइवर
क्लीनर
👉 उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि – “हमें अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर और साइंटिस्ट बनाना होगा, ताकि समाज की तरक्की हो.”
जाति-धर्म नहीं, शिक्षा सबसे जरूरी!
👉 गडकरी ने अपने भाषण में साफ किया कि जातिवाद और धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर देश को आगे बढ़ाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि – “हमें राजनीति में नहीं, बल्कि शिक्षा, विज्ञान और विकास में आगे बढ़ना चाहिए.”
गडकरी का संदेश – बदलाव जरूरी!
नागपुर में दिए गए इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है. क्या गडकरी के ये बयान जातिवादी राजनीति पर बड़ा हमला हैं? क्या मुस्लिम समाज उनकी अपील को अपनाएगा? यह देखने वाली बात होगी.
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