दालें हमारे भोजन का अहम हिस्सा हैं। ये प्रोटीन और फाइबर का मुख्य स्रोत हैं, लेकिन अक्सर दाल खाने के बाद पेट फूलना और गैस बनना आम समस्या बन जाती है। न्यूट्रिशनिस्टों का कहना है कि यह समस्या पूरी तरह से दाल की वजह से नहीं, बल्कि पाचन और खाने के तरीके से जुड़ी होती है।
ज्यादा गैस बनाने वाली दालें
राजमा और छोले
राजमा और छोले में फाइबर और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है। इन्हें पचाने में पेट को अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे गैस बनने की संभावना बढ़ जाती है।
काबुली चना
काबुली चने में प्रोटीन तो प्रचुर मात्रा में होता है, लेकिन इनमें रफ्टोस और लेक्टिन जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो गैस और पेट फूलने का कारण बन सकते हैं।
मसूर दाल (कुछ प्रकार)
सामान्य लाल मसूर तो जल्दी पचती है, लेकिन हरे या साबुत मसूर में फाइबर अधिक होता है, जो गैस बढ़ा सकता है।
गैस कम करने के आसान तरीके
दाल भिगोकर पकाएं
न्यूट्रिशनिस्ट सलाह देते हैं कि दाल को कम से कम 6-8 घंटे पानी में भिगोकर पकाना चाहिए। इससे दाल के भारी तत्व गल जाते हैं और पाचन आसान होता है।
अजवाइन या हींग डालें
दाल में थोड़ी हींग या अजवाइन डालने से गैस बनने की संभावना कम हो जाती है।
धीरे-धीरे खाएं
जल्दी-जल्दी खाना खाने से पेट में हवा जाती है और गैस की समस्या बढ़ती है।
पानी पर्याप्त पीएं
दाल खाने के साथ पर्याप्त पानी पीने से पाचन आसान होता है और पेट फूलने की समस्या कम होती है।
हल्का मसाला इस्तेमाल करें
बहुत तीखा या भारी मसाला पेट को परेशान कर सकता है। हल्के मसाले और कम तेल में पकाई गई दाल आसानी से पचती है।
न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह
मिक्स दाल: अलग-अलग दालों को मिलाकर पकाने से न केवल प्रोटीन मिलता है, बल्कि गैस की समस्या भी कम होती है।
साबुत अनाज के साथ: दाल को चावल या रोटी के साथ संतुलित मात्रा में लें।
रोजाना थोड़ी मात्रा में खाएं: ज्यादा मात्रा में खाने से गैस बढ़ती है।
न्यूट्रिशनिस्ट कहते हैं कि दालें पेट के लिए फायदेमंद हैं, लेकिन सही तरीके से पकाने और खाने से ही इनका लाभ मिलता है।
यह भी पढ़ें:
डायबिटीज, किडनी या पाचन समस्या? ये 4 लोग भूलकर भी न खाएं कद्दू के बीज
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check