डायबिटीज यानी शुगर की समस्या में सही आहार का चुनाव बेहद जरूरी है। दालें प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं, लेकिन सभी दालें शुगर मरीजों के लिए सुरक्षित नहीं होतीं। कुछ दालें ब्लड शुगर को बढ़ा सकती हैं, जबकि कुछ को नियमित सेवन से शुगर नियंत्रित रहती है।
डायबिटीज में टॉक्सिक मानी जाने वाली दालें
- चना (काले या सफेद) – अत्यधिक सेवन
- उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली दालें ब्लड शुगर बढ़ा सकती हैं।
- राजमा (किडनी बीन्स)
- अगर अधिक मात्रा में खाई जाए तो शुगर लेवल पर असर पड़ता है।
- सोया बीन्स
- प्रोसेस्ड सोया या अधिक सेवन से इन्सुलिन सेंसिटिविटी कम हो सकती है।
नोट: ये दालें सीमित मात्रा में और संतुलित आहार के साथ ली जा सकती हैं।
डायबिटीज में सुरक्षित और फायदेमंद दालें
- मसूर की दाल
- लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स और फाइबर से भरपूर।
- ब्लड शुगर को धीरे-धीरे बढ़ाती है।
- मुंग की दाल (हरी या पीलें)
- जल्दी पचने वाली, हल्की और प्रोटीन से भरपूर।
- डायबिटीज मरीजों के लिए बेहतरीन।
- अरहर/तुअर दाल (पीलें या लाल)
- लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाली, शुगर को कंट्रोल करती है।
- हृदय और पेट दोनों के लिए फायदेमंद।
- काबुली चना (सिर्फ सीमित मात्रा में)
- फाइबर से भरपूर, ब्लड शुगर कंट्रोल में मदद करता है।
दालें खाने के टिप्स
- दालें उबालकर और हल्का मसाला डालकर खाएं।
- भुनी या तली हुई दालें शुगर मरीजों के लिए ठीक नहीं।
- दालों के साथ हरी सब्जियां और सलाद लें ताकि ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम रहे।
- सीमित मात्रा में ही दालें खाएं, ओवरईटिंग से बचें।
सही दालों का चुनाव और संतुलित सेवन डायबिटीज मरीजों के लिए ब्लड शुगर कंट्रोल और सेहत बनाए रखने में मदद करता है। ध्यान रहे, दालों के साथ पूरी डाइट और लाइफस्टाइल का संतुलन भी जरूरी है।
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