युवा हो या बुजुर्ग, जानें उम्र के हिसाब से प्रोटीन की सही खुराक

आज के समय में प्रोटीन को स्वास्थ्य का सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व माना जाता है। यह मांसपेशियों, हड्डियों और प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए बेहद आवश्यक है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रोटीन की आवश्यकता उम्र के अनुसार बदलती रहती है? विशेषज्ञों का कहना है कि हर उम्र में प्रोटीन की सही मात्रा लेना सेहत और जीवनशैली दोनों के लिए जरूरी है।

प्रोटीन की भूमिका
प्रोटीन शरीर के हर सेल का मुख्य घटक है। यह मांसपेशियों को मजबूत करता है, घाव भरने में मदद करता है और त्वचा व बालों को स्वस्थ बनाए रखता है। इसके अलावा यह एनर्जी प्रदान करने और हॉर्मोन तथा एंजाइम बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है।

उम्र के अनुसार प्रोटीन की आवश्यकता

शिशु और बच्चों (1–12 वर्ष)
इस उम्र में शरीर तेजी से बढ़ता है। डॉक्टरों के अनुसार 1–12 साल के बच्चों को प्रतिदिन लगभग 1–1.2 ग्राम प्रोटीन प्रति किलो वजन के हिसाब से लेना चाहिए। डेयरी, अंडा, दालें और हल्का मांस इसके अच्छे स्रोत हैं।

किशोर और युवा (13–24 वर्ष)
यह उम्र मसल्स और हड्डियों की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण होती है। यहां प्रोटीन की जरूरत बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार इस उम्र में 1–1.5 ग्राम प्रोटीन प्रति किलो वजन लेना फायदेमंद रहता है। सोया, चिकन, दाल और अंडे जैसे प्रोटीन स्रोत काम आते हैं।

वयस्क (25–50 वर्ष)
वयस्कों को मसल्स और इम्यूनिटी को मजबूत रखने के लिए पर्याप्त प्रोटीन की जरूरत होती है। सामान्य वयस्कों के लिए लगभग 0.8–1 ग्राम प्रति किलो वजन पर्याप्त माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि प्रोटीन को पूरे दिन के भोजन में बराबर बांटा जाए।

बुजुर्ग (50+ वर्ष)
उम्र बढ़ने के साथ मसल्स का मास घटने लगता है। इस उम्र में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना जरूरी है ताकि मसल मास और हड्डियों की ताकत बनी रहे। डॉक्टर्स के अनुसार बुजुर्गों को 1–1.2 ग्राम प्रोटीन प्रति किलो वजन प्रतिदिन लेना चाहिए। इसके लिए अंडा, दूध, पनीर और दालें अच्छे विकल्प हैं।

विशेषज्ञ की सलाह
डॉक्टर्स का कहना है कि प्रोटीन सिर्फ मांसपेशियों के लिए नहीं, बल्कि समग्र स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। प्रोटीन की कमी से कमजोरी, बाल झड़ना, मसल्स कमजोर होना और रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं, जरूरत से ज्यादा प्रोटीन भी हानिकारक हो सकता है, इसलिए सही मात्रा और स्रोत का ध्यान रखना जरूरी है।

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