आजकल गलत खान-पान और लाइफस्टाइल के कारण यूरिक एसिड बढ़ना एक आम समस्या बन गई है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन अगर समय रहते कंट्रोल न किया जाए तो यह गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यूरिक एसिड शरीर में आखिर कहां जमा होता है और कौन-सा लेवल खतरनाक माना जाता है?
यूरिक एसिड क्या है?
यूरिक एसिड शरीर में प्यूरीन नामक तत्व के टूटने से बनता है। आमतौर पर किडनी इसे फिल्टर करके यूरिन के जरिए बाहर निकाल देती है। लेकिन जब इसका उत्पादन ज्यादा हो जाता है या किडनी सही से बाहर नहीं निकाल पाती, तो यह शरीर में जमा होने लगता है।
शरीर में यूरिक एसिड कहां जमता है?
1. जोड़ों में (खासकर पैर के अंगूठे में)
यूरिक एसिड सबसे ज्यादा जोड़ों में क्रिस्टल के रूप में जमा होता है।
- पैर का अंगूठा
- घुटने
- टखने
- उंगलियों के जोड़
यहीं से गाउट जैसी दर्दनाक बीमारी की शुरुआत होती है।
2. किडनी में
अधिक यूरिक एसिड किडनी में जमा होकर
- किडनी स्टोन
- किडनी डैमेज
- यूरिन पास करने में दर्द
जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।
3. टिशू और कार्टिलेज में
लंबे समय तक हाई यूरिक एसिड रहने पर यह आसपास के टिशू और कार्टिलेज को नुकसान पहुंचाता है, जिससे सूजन और अकड़न बढ़ जाती है।
यूरिक एसिड का नॉर्मल और खतरनाक लेवल
- पुरुषों में नॉर्मल: 3.4 – 7.0 mg/dL
- महिलाओं में नॉर्मल: 2.4 – 6.0 mg/dL
👉 7 mg/dL से ऊपर पहुंचते ही यूरिक एसिड कंट्रोल से बाहर माना जाता है और गाउट का खतरा तेजी से बढ़ जाता है।
हाई यूरिक एसिड के लक्षण
- जोड़ों में तेज दर्द और सूजन
- सुबह उठते समय अकड़न
- चलने-फिरने में परेशानी
- पेशाब में जलन
- थकान और बेचैनी
यूरिक एसिड बढ़ने के मुख्य कारण
- ज्यादा प्रोटीन और प्यूरीन-युक्त भोजन
- रेड मीट, शराब और सी-फूड का अधिक सेवन
- कम पानी पीना
- मोटापा
- किडनी से जुड़ी समस्याएं
यूरिक एसिड कंट्रोल करने के आसान उपाय
- दिन में 8–10 गिलास पानी पिएं
- हरी सब्ज़ियां और फल डाइट में शामिल करें
- शराब और रेड मीट से दूरी बनाएं
- वजन कंट्रोल रखें
- नियमित हल्की एक्सरसाइज करें
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर बार-बार जोड़ों में दर्द, सूजन या यूरिक एसिड का लेवल लगातार बढ़ा हुआ आ रहा है, तो देरी न करें और डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
यूरिक एसिड शरीर में मुख्य रूप से जोड़ों और किडनी में जमा होता है। अगर इसका लेवल तय सीमा से ऊपर चला जाए, तो गाउट और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। सही खान-पान और समय पर जांच से इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check