अक्सर हमें सलाह दी जाती है कि दिनभर खूब पानी पिएं, क्योंकि पानी शरीर के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है? इस स्थिति को वॉटर टॉक्सिसिटी (Water Toxicity) या ओवरहाइड्रेशन कहा जाता है। यह तब होती है जब शरीर में पानी की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है और सोडियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ जाता है।
क्या होती है वॉटर टॉक्सिसिटी?
वॉटर टॉक्सिसिटी में खून में सोडियम का स्तर अचानक बहुत कम हो जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में हाइपोनेट्रेमिया (Hyponatremia) कहा जाता है। सोडियम की कमी से शरीर की कोशिकाएं फूलने लगती हैं, खासकर दिमाग की कोशिकाएं, जिससे गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।
ज्यादा पानी पीने से क्यों होता है नुकसान?
- किडनी एक समय में सीमित मात्रा में ही पानी बाहर निकाल सकती है
- जरूरत से ज्यादा पानी पीने पर खून पतला हो जाता है
- इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बिगड़ जाता है
- दिमाग में सूजन आने का खतरा बढ़ जाता है
वॉटर टॉक्सिसिटी के लक्षण
- लगातार सिरदर्द
- मतली और उल्टी
- चक्कर आना
- हाथ-पैरों में सूजन
- ज्यादा थकान और कमजोरी
- भ्रम की स्थिति या ध्यान लगाने में परेशानी
- गंभीर मामलों में बेहोशी या दौरे पड़ना
किन लोगों को ज्यादा खतरा रहता है?
- बहुत ज्यादा एक्सरसाइज करने वाले लोग
- मैराथन रनर या खिलाड़ी
- बहुत कम समय में बहुत ज्यादा पानी पीने वाले
- किडनी या हार्ट के मरीज
- जो लोग बिना प्यास लगे बार-बार पानी पीते हैं
कितना पानी पीना है सही?
हर व्यक्ति के लिए पानी की जरूरत अलग-अलग होती है। यह उम्र, वजन, मौसम और गतिविधि पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर:
- प्यास लगने पर पानी पीना सबसे सुरक्षित तरीका है
- पेशाब का रंग हल्का पीला हो तो समझें शरीर में पानी पर्याप्त है
- जबरदस्ती बहुत ज्यादा पानी पीने से बचें
वॉटर टॉक्सिसिटी से कैसे बचें?
- थोड़े-थोड़े समय में पानी पिएं
- बहुत ज्यादा पसीना आने पर सिर्फ पानी नहीं, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स भी लें
- बिना प्यास लगे बार-बार पानी पीने की आदत न बनाएं
- एक्सरसाइज या वर्कआउट के दौरान संतुलित मात्रा में तरल लें
- किडनी या हार्ट मरीज डॉक्टर की सलाह से ही पानी की मात्रा तय करें
पानी जीवन के लिए जरूरी है, लेकिन इसकी अधिकता भी नुकसानदायक हो सकती है। जरूरत से ज्यादा पानी पीना शरीर में गंभीर असंतुलन पैदा कर सकता है, जिसे वॉटर टॉक्सिसिटी कहा जाता है। इसलिए समझदारी यही है कि शरीर की जरूरत के अनुसार ही पानी पिया जाए।
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