यूरोप में इस्लामिक पहनावे को लेकर बहस एक बार फिर तेज़ हो गई है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के नेतृत्व वाली दक्षिणपंथी सरकार अब देश में बुर्का और नकाब पर पूर्ण प्रतिबंध की दिशा में कदम बढ़ा रही है। अगर यह प्रस्तावित कानून पारित हो जाता है, तो सार्वजनिक स्थानों पर बुर्का या चेहरा ढकने वाले किसी भी परिधान को पहनने पर तीन लाख यूरो तक का जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
क्या है प्रस्तावित कानून?
सूत्रों के अनुसार, इटली की संसद में जल्द ही एक प्रस्ताव पेश किया जा सकता है, जिसमें सार्वजनिक स्थलों—जैसे पार्क, स्कूल, सरकारी दफ्तर, अस्पताल और ट्रांसपोर्ट सिस्टम में—चेहरा पूरी तरह ढकने वाले बुर्का या नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। इस कानून के उल्लंघन पर तीन लाख यूरो (करीब 2.7 करोड़ रुपये) तक का भारी-भरकम जुर्माना और संभावित जेल की सजा भी हो सकती है।
सरकार की दलील: “सुरक्षा पहले”
प्रधानमंत्री मेलोनी की पार्टी Brothers of Italy ने इस प्रस्ताव को “राष्ट्रीय सुरक्षा” के दृष्टिकोण से सही ठहराया है। पार्टी का मानना है कि चेहरा पूरी तरह से ढकने वाले परिधान—चाहे धार्मिक कारणों से ही क्यों न हों—आतंकवाद, अपराध और पहचान छुपाने के प्रयासों में उपयोग हो सकते हैं, जिससे समाज में खतरा बढ़ सकता है।
सरकार का यह भी कहना है कि ये कदम किसी विशेष धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी नागरिकों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा रहा है।
विरोध में उठीं आवाज़ें
दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों और मुस्लिम समुदायों ने इस प्रस्ताव पर गहरी आपत्ति जताई है। उनके अनुसार, यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अभिव्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन होगा। कई संगठनों ने इसे “इस्लामोफोबिक नीति” करार दिया है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसकी निंदा की जा रही है।
यूरोप में पहले भी लग चुके हैं ऐसे प्रतिबंध
गौरतलब है कि फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैंड्स और डेनमार्क जैसे कई यूरोपीय देशों में पहले ही बुर्का और नकाब पर आंशिक या पूर्ण प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। अब इटली भी उसी दिशा में कदम बढ़ाता नजर आ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव आने वाले समय में इटली की सामाजिक और धार्मिक राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।
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