बिहार से वोट और गुजरात को फैक्ट्री? लालू यादव ने उठाए पीएम मोदी की नीतियों पर सवाल

बिहार की सियासत एक बार फिर गर्म हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि “भाजपा को जीत चाहिए बिहार से, लेकिन विकास और फैक्ट्रियां गुजरात में लगाई जा रही हैं।” लालू यादव का यह बयान आगामी चुनावों की सरगर्मियों के बीच सियासी बहस का केंद्र बन गया है।

लालू का आरोप – “बिहार सिर्फ वोट बैंक बनकर रह गया”

राजद सुप्रीमो ने पटना में आयोजित एक जनसभा में कहा,

“बिहार के लोगों से वादे किए जाते हैं, लेकिन जब सत्ता में आते हैं तो सारी फैक्ट्री, निवेश और सुविधाएं गुजरात भेज दी जाती हैं। क्या बिहार सिर्फ वोट देने के लिए है?”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिहार को केंद्र सरकार द्वारा योजनाबद्ध तरीके से नजरअंदाज किया जा रहा है।

“यहां युवाओं को रोजगार नहीं, बस भाषण मिलता है।”

गुजरात को मिल रही औद्योगिक प्राथमिकता पर सवाल

लालू यादव का इशारा हाल ही में गुजरात में लॉन्च की गई नई औद्योगिक परियोजनाओं और मेक इन इंडिया निवेश घोषणाओं की ओर था, जिन्हें केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धियों के तौर पर प्रस्तुत किया गया। लालू ने तंज कसते हुए कहा कि “बिहार के नौजवान पलायन कर रहे हैं और सरकार गुजरात को मॉडल स्टेट बता रही है।”

राजनीतिक विश्लेषण: तंज के पीछे रणनीति

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि लालू प्रसाद यादव का यह बयान महज हमला नहीं बल्कि राजद की रणनीतिक कोशिश है—बिहार के लोगों में “विकास की उपेक्षा” की भावना को उभारना। खासकर युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं को यह संदेश देना कि केंद्र सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है।

भाजपा की प्रतिक्रिया – “झूठ का पुलिंदा”

लालू यादव के इस बयान पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि

“प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बिहार को अब तक की सबसे ज्यादा केंद्रीय योजनाएं मिली हैं। चाहे वह सड़क परियोजनाएं हों, गैस कनेक्शन हों या AIIMS और मेडिकल कॉलेज।”
भाजपा प्रवक्ता ने लालू पर कटाक्ष करते हुए कहा,
“जिनके राज में बिहार जंगलराज बना, वे अब विकास पर ज्ञान दे रहे हैं।”

चुनावी नजरिए से बड़ा मुद्दा बन सकता है बिहार-गुजरात संतुलन

बिहार में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं और राजद इस बार विकास, रोजगार और क्षेत्रीय सम्मान को मुख्य मुद्दा बनाने की दिशा में काम कर रही है। ऐसे में लालू यादव की यह टिप्पणी महज तंज नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है।

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