यूपी के पूर्वांचल की राजनीतिक जमीन को साधने दो दिग्ग्ज नेता मैदान में उतर रहे हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ गाजीपुर से राजनीतिक माहौल को गरमाते दिखेंगे। वहीं, अखिलेश यादव आजमगढ़ से पूर्वांचल की राजनीति को साधने की कोशिश करेंगे। यूपी में दस सीटों पर विधानसभा के उपचुनाव होने हैं। इसे लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतर चुकी हैं। अभी तक चुनावी माहौल को गरमाने में बीजेपी आगे थी लेकिन यादव भी अब मैदान में उतर आए हैं।
लोकसभा चुनाव में पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए यूपी की राजनीति में साइकिल दौड़ाने वाले अखिलेश यादव एक बार फिर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, लोकसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद सीएम योगी और बीजेपी अपना दबदबा कायम का प्रयास कर रही है। विधानसभा उपचुनाव में सीएम योगी के साथ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक भी जोर-जोर से जुटे गए हैं।
यूपी के पूर्वांचल की राजनीति कुछ अलग है यहां से सीएम योगी और पीएम नरेंद्र मोदी जीतकर आते हैं। इसके बाद भी बीजेपी पूरी ताकत के साथ यहां पांव जमा पाने में असफल रही है। इसका सबसे बड़ा कारण पिछड़ा, दलित वोट बैंक है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पिछड़ा, दलित वोट बैंक को साध लिया था। इसका असर चुनाव परिणाम में दिखा। जहां 2014 में बीजेपी ने यूपी की 80 में से 71 सीटें जीती थी। वहीं, 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को 62 सीटों पर जीत मिली।
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को यूपी के अन्य इलाकों के साथ-साथ पूर्वांचल और अवध में करारी हार मिली है। इसका कारण अखिलेश यादव की पीडीए पॉलिटिक्स रही। पिछड़ा और दलित उम्मीदवारों के जरिए अखिलेश ने मुस्लिम-यादव की राजनीति के दायरे को तोड़ने का प्रयास किया। इसमें वह कामयाब भी रहे।
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